BREAKING: कश्मीर घाटी में सुबह-सुबह डोली धरती, भूकंप के झटके से दहशत में आए लोग; रिक्टर स्केल पर इतनी रही तीव्रता

Kashmir Earthquake: कश्मीर घाटी में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। झटके महसूस होते ही लोग आनन-फानन में अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए।

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Earthquake
Earthquake | Image: X

Earthquake in Jammu Kashmir: सोमवार की सुबह कश्मीर घाटी के लोगों की नींद उस समय टूट गई, जब अचानक धरती कांप उठी। झटके महसूस होते ही लोग हाड़ कंपाने वाली ठंड में अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूकंप के ये झटके मध्यम तीव्रता का बताया जा रहा है, जो रिक्टर स्केल पर अनुमानित तीव्रता 4.6 आंकी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रहा।

करीब 10 किमी की गहराई पर रहा केंद्र

जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। भूकंप के झटके सिर्फ मुख्य केंद्र तक सीमित नहीं थे, बल्कि श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां और चरार-ए-शरीफ समेत आसपास के कई इलाकों में भी महसूस किए गए हैं।

कोई जानमान का नुकसान नहीं

भूकंप के झटकों ने लोगों को खौफजदा कर दिया। तड़के जब लोग सो रहे थे तभी अचानक जमीन हिलने लगी। लोगों के लिए भूकंप का अनुभव काफी डरावना रहा। हालांकि राहत की बात ये है कि अबतक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। 

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भूकंप (Earthquake) क्यों आता है?

भूकंप तब आते हैं जब टेक्टोनिक प्लेट अचानक एक-दूसरे से खिसक जाती हैं, जिससे भूकंपीय तरंगों के रूप में जमा ऊर्जा निकलती है। ये प्लेटें पृथ्वी की सतह के नीचे एक अर्ध-तरल परत पर स्थित होती हैं और सतह के नीचे लगातार धीमी गति से चलती रहती हैं। कभी-कभी विशाल प्लेटें आपस में टकराती हैं, अलग हो जाती हैं या एक-दूसरे के खिलाफ खिसकती हैं जिससे जमीन हिलती है।

प्लेट की हरकतों के तीन प्रकार मुख्य रूप से भूकंप का कारण बनते हैं, जिनमें अभिसारी सीमाएं होती हैं। ऐसे में प्लेटें टकराती हैं और एक दूसरे के नीचे चली जाती हैं। अपसारी सीमा की स्थिति में प्लेटें अलग हो जाती हैं और मैग्मा ऊपर आकर एक नई सतह बनाता है और सीमाएं बदलता है, जहां प्लेटें क्षैतिज रूप से एक-दूसरे से खिसकती हैं, जिससे घर्षण और तनाव पैदा होता है जो आखिर में भूकंप का कारण बनता है। हालांकि, ज्वालामुखी गतिविधि भी भूकंप को ट्रिगर करने का एक कारण हो सकती है, क्योंकि मैग्मा पृथ्वी की सतह के नीचे चला जाता है।

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भारत और इसके भूकंप क्षेत्र

भारत के भूभाग को संशोधित मर्कली (एमएम) पैमाने के आधार पर अलग-अलग भूकंप क्षेत्रों में बांटा गया है। कम तीव्रता वाला क्षेत्र जो देश के लगभग 40.93 फीसदी हिस्से को कवर करता है, दक्षिण में जोन II और कुछ अन्य क्षेत्रों में आता है। जोन III में 30.79 फीसदी हिस्सा है, जहां तीव्रता मध्यम होती है, जिनमें केरल, गोवा और पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्से शामिल हैं। हाई तीव्रता वाली श्रेणी के जोन IV में 17.49 प्रतिशत क्षेत्र शामिल है, जिसमें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली आते हैं। सबसे गंभीर क्षेत्र जोन V है, जिसमें लगभग 10.79 फीसदी भूमि कवरेज है और इसमें उत्तरी बिहार, गुजरात में कच्छ का रण और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।

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Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड