2004 से 2014 के बीच माओवादी आतंक के कारण 1700 हजार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थी, 7000 जानें गईं- PM मोदी
रिपब्लिक समिट 2026 (Republic Summit 2026) में शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज माओवादी अपनी अंतिम सांसे गिन रही हैं।
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देश के सबसे बड़े न्यूज इवेंट रिपब्लिक समिट 2026 (Republic Summit 2026) में विभिन्न क्षेत्रों की कई दिग्गज हस्तियों की शिरकत रही। कार्यक्रम में BJP के कई दिग्गज नेताओं के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। इस समिट में पीएम मोदी ने कहा '2004 से 2014 के बीच माओवादी आतंक के कारण 1700 हजार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थी, इस बीच 7000 जानें गईं, लेकिन आज माओवादी अपनी अंतिम सांसे गिन रही हैं। इस बीच उन्होंने कहा बस्तर जिले में आज आतंक नहीं, बल्कि आज स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस के राज में माओवाद के कारण बही खून की नदियां बहती थी, लेकिन कांग्रेस कुछ नहीं कर पाती थी।
2004-2014 के बीच माओवादी आतंक के कारण 7000 जानें गईं-PM मोदी
पीएम मोदी ने रिपब्लिक समिट 2026 को संबोधित करते हुए कहा ''2004 से 2014 के बीच माओवादी आतंक के कारण 1700 हजार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थी इस बीच 7000 जानें गईं। आगे उन्होंने कहा 'नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संविधान का नाम लेने मात्र से ही लोगों को गोली मार दी जाती थी, फिर भी ये लोग चुप रहे। उस समय संविधान उनके हाथों में कहीं नहीं था। उनके हाथ कांपते थे। कांग्रेस को इस दर्दनाक वास्तविकता की कोई परवाह नहीं थी। 2014 के बाद, हमने 'राष्ट्र पहले' की भावना से इन परिस्थितियों को बदलने का बीड़ा उठाया। हमने यह मार्ग अपनाया।'
नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से उखाड़ फेंका-PM मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा 'हमने केवल बातें नहीं कीं, न ही लगातार प्रचार किया, बल्कि हमने निश्चित रूप से कार्रवाई की। हमने नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया। आज पूरा देश इसके परिणाम देख सकता है। भारत में माओवादी आतंक अब अपने अंतिम चरण में है। कई बार अंतिम परिणाम इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी होता है कि उसके पीछे की मेहनत अनसुनी रह जाती है।'
आगे उन्होंने कहा 'नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में, जहां आम लोग भी हर दिन डर में जीते थे, अपहरण, जबरन वसूली या अपनी थोड़ी-बहुत संपत्ति लूट लिए जाने का निरंतर डर बना रहता था। ये ऐसे स्थान थे जहां विकास की बात करना भी असंभव था, उसे ज़मीनी स्तर पर लाना तो दूर की बात है। सब कुछ असंभव लग रहा था। फिर भी, हमने इन क्षेत्रों में विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे कदम बढ़ाया। पिछले 12 वर्षों में, हमारी सरकार ने इन क्षेत्रों में 12,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई हैं।'
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