
'इराज के पापा...',बेटे के बर्थडे पर पापा तेजस्वी का कूल अंदाज, चाचा तेजू ने भी दुलारा; लालू परिवार ने ऐसे मनाया जन्मदिन का जश्न
तेजस्वी यादव के बेटे इराज का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। इस समारोह में पूरा लालू परिवार जुटा। हालांकि, लालू को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दिया।
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आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बेटे इराज का पहला जन्मदिन गाजियाबाद में धूमधाम से मनाया। इस खास मौके पर पूरा पूरिवार एकजुट दिखा। पार्टी में तेजप्रताप यादव और मीसा भारती भी शामिल हुईं।
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इस पार्टी से कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बेटे के जन्मदिन के मौके पर तेजस्वी यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। वे 'इराज के पापा' लिखी शर्ट पहने नजर आए।
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इस बर्थडे पार्टी का आयोजन लालू यादव की बेटी रागिनी और दामाद राहुल यादव के आवास 'रागिनी विला' में किया गया था।
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बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान लालू यादव की खुशी भी देखने लायक रही। पोते की केक कटिंग से लेकर पूरे आयोजन में वे सक्रिय रूप से शामिल रहे। राबड़ी देवी भी पोते इराज को केक खिलाकर दुलार करती नजर आईं।
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इनके अलावा लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव भी बेहद खुश दिखाई दिए। उन्होंने भतीजे को खूब दुलार किया। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से तेजप्रताप परिवार और पार्टी की गतिविधियों से थोड़े अलग-थलग पड़ गए थे।
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लेकिन इस पारिवारिक समारोह में उनकी मौजूदगी संकेत दे रही है कि उनके और परिवार के बीच रिश्ते ठीक हो रहे हैं।
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तेजस्वी यादव की बड़ी बहन और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने भी भतीजे को खूब प्यार किया। इराज बड़ी बुआ की गोद में खेलते दिखे।
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पार्टी में पूरा लालू परिवार एक जुट नजर आया। लेकिन लालू यादव को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य नदारद रहीं। बता दें कि बिहार चुनाव में करारी हार के बाद रोहिणी और तेजस्वी के बीच झगड़ा हुआ था।
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इस बेहद खास मौके पर आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र समेत कई दिग्गज नेता और बेहद करीबी लोग शामिल हुए। सभी नेताओं ने बच्चे को आशीर्वाद और तेजस्वी यादव को बधाई दी।
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हाई-प्रोफाइल पार्टी में विपक्ष का कोई बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि समारोह के लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी समेत कई नेताओं को निमंत्रण भेजा गया था।
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सियासी जानकारों का मानना है कि इसके लिए लालू विपक्षी नेताओं को एक मंच पर जुटाना चाहते थे। इसका मकसद यह संदेश पहुंचाना था कि हार के बाद बिहार की राजनीति में उनकी पकड़-राजनीतिक नेटवर्क अब भी मजबूत है।
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