
Kim Jong Un: डाइनिंग कार, वाइन-बार से सैटेलाइट फोन तक... किम जोंग की बख्तरबंद ट्रेन एक किला है, जो किन-किन देशों का कर सकती है सफर?
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन चीन के मिलिट्री परेड में शामिल होने के लिए बीजिंग पहुंचे। मीडिया में चर्चा है कि किम अपने साथ अपनी 12 साल की बेटी किम जू ए को लेकर चीन आए। हैरानी की बात यह है कि किम पहली बार विदेश दौरे पर अपनी बेटी के साथ पहुंचे। हालांकि, किम के बारे में इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात कुछ और भी है।
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उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन चीन के मिलिट्री परेड में शामिल होने के लिए पहुंचे हुए हैं।
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मीडिया में चर्चा है कि किम अपने साथ अपनी 12 साल की बेटी किम जू ए को लेकर चीन पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि किम पहली बार विदेश दौरे पर अपनी बेटी के साथ आए।
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अक्सर ऐसा होता है कि दुनिया का कोई भी नेता किसी दूसरे देश जाता है, तो हवाई जहाज से ही जाता है। लेकिन उत्तर कोरिया के तानाशाह एक ऐसे नेता हैं, जो कहीं भी जाने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं।
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किम चीन के विक्ट्री डे परेड में शामिल होने के लिए ट्रेन से ही उत्तर कोरिया से यहां पहुंचे। उत्तर कोरिया की राजधानी से चीन पहुंचने में उन्हें करीब 20 घंटे का सफर तय करना पड़ा।
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खास बात यह है कि इस ट्रेन से केवल किम जोंग ही नहीं, उनके पिता किम जोंग इल और उनके दादा किम इल सुंग भी सफर करते थे।
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ट्रेन को इस तरह से तैयार किया गया है कि इसमें सारी जरूरतों और सुविधाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का ध्यान रखा गया है।
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किम की यह ट्रेन सुरक्षा की दृष्टि से केवल उन्हीं देशों तक जाती है, जहां तक डायरेक्ट रेल कनेक्शन मौजूद है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह ट्रेन मंगोलिया तक जा सकती है।
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साल 2019 में उत्तर कोरिया के तानाशाह इस ट्रेन से चीन के बीजिंग और रूस के व्लादिवोस्तोक तक गए थे। इस ट्रेन को पूरी तरह से बुलेटप्रूफ बनाया गया है।
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हर डिब्बे को स्टील की मोटी परत के साथ तैयार किया गया है। ट्रेन के अदंर आधुनिक संचार तकनीक, सैटेलाइट फोन, बड़े मीटिंग हॉल, डाइनिंग कार और वाइन-बार तक की सुविधा है।
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किम जब ट्रेन से सफर करते हैं, तो उनके इस ट्रेन के साथ-साथ दो अन्य ट्रेनें भी जाती है। पहली ट्रेन में नॉर्थ कोरिया के तानाशाह के सुरक्षाकर्मी समेत जांच टीम मौजूद होते हैं।
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दूसरी में खुद तानाशाह और तीसरी ट्रेन में सप्लाई और अन्य सामान ले जाया जाता है। किम जोंग-उन की ट्रेन की औसत स्पीड सिर्फ 60 किमी/घंटा है।
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इस रफ्तार पर इसलिए किम की ट्रेन चलती है, ताकि रूट की जांच की जा सके और खतरों का पता लगाकर उसे खत्म किया जाए।
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विदेशी मीडिया की मानें तो इस ट्रेन में प्रति किलोमीटर करीब 25–30 लाख वॉन यानि कि लगभग 15–18 लाख भारतीय रुपए खर्च किए जाते हैं।
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