
Fake Pulses: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल वाली दाल? सिर्फ 2 मिनट में करें असली और नकली की पहचान
How To Buy Pulses: आजकल बाजार में मिलावटखोरी इतनी बढ़ गई है कि खाने-पीने की हर चीज पर शक होने लगा है। खासतौर पर दालें, जो हर भारतीय रसोई का जरूरी हिस्सा हैं, वही अब नकली और केमिकल वाली मिलने लगी हैं। ये दालें देखने में बिल्कुल असली जैसी लगती हैं, लेकिन सेहत के लिए बेहद खतरनाक होती हैं। आइए जानते हैं कैसे करें असली और नकली दाल की पहचान।
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पानी से करें टेस्ट
एक कटोरी पानी में दाल डाल दें। अगर दाल ऊपर तैरने लगे, तो इसमें पॉलिशिंग के लिए केमिकल इस्तेमाल किया गया है। असली दाल पानी में नीचे बैठ जाती है, क्योंकि उसका वजन ज्यादा होता है।
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रंग से पहचानें
अगर दाल का रंग बहुत ज्यादा चमकीला है, तो सतर्क हो जाएं। असली दाल का रंग थोड़ा फीका होता है। नकली या केमिकल वाली दाल में आर्टिफिशियल कलर या पॉलिश की जाती है, ताकि वह ज्यादा आकर्षक दिखे।
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गर्म करें
- थोड़ी सी दाल को एक प्लेट पर रखकर गैस के या तेज धूप में रख दें।
- अगर उसमें से अजीब सी गंध आने लगे, तो वह केमिकल से तैयार की गई है।
- असली दाल से कभी भी रासायनिक या प्लास्टिक जैसी गंध नहीं आती है।
हाथ से मसलकर देखें
- थोड़ी सी दाल को हाथ में लेकर मसलें।
- अगर रंग हाथ में चिपक जाए या फैल जाए, तो यह नकली या रंगी हुई दाल है।
- असली दाल मसलने पर कोई रंग नहीं छोड़ती और उसकी सतह थोड़ी खुरदरी महसूस होती है।
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भरोसेमंद जगह से ही खरीदें
हमेशा दालें पैक्ड और FSSAI मार्क वाली जगह से ही खरीदें। खुले बाजार की सस्ती दालें कभी-कभी देखने में असली लगती हैं, लेकिन उनमें मिलावट या पॉलिश की संभावना ज्यादा होती है।
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सेहत पर असर
नकली या केमिकल वाली दालें लंबे समय तक खाने से पेट दर्द, उल्टी, और गैस की समस्या, लिवर और किडनी को नुकसान और बच्चों में पाचन की गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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थोड़ी सी सावधानी से आप खुद असली और नकली दाल की पहचान कर सकते हैं। चमकदार दाल हमेशा अच्छी नहीं होती है। जितनी नेचुरल दिखने वाली दाल होगी, उतनी ही हेल्दी और फायदेमंद होगी।
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