महिलाओं के नजरिए से अपराध की दुनिया को दिखाती है 'डब्बा कार्टेल' : शबाना आजमी
अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा है कि अपराध आधारित फिल्मों में महिलाओं का आमतौर पर केवल एक आकर्षक महिला का कोई मामूली सा किरदार होता है लेकिन हाल में रिलीज उनकी ‘डब्बा कार्टेल’ सीरीज में ऐसा नहीं है।
- मनोरंजन समाचार
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अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा है कि अपराध आधारित फिल्मों में महिलाओं का आमतौर पर केवल एक आकर्षक महिला का कोई मामूली सा किरदार होता है लेकिन हाल में रिलीज उनकी ‘डब्बा कार्टेल’ सीरीज में ऐसा नहीं है।
आजमी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘जब आप महिलाओं को इस तरह की स्थितियों में देखते हैं तो आप उन्हें हमेशा पिछलगुआ के रूप में देखते हैं। वे या तो केवल किसी आकर्षक महिला के रूप में दिखाई जाती है या कोई मामूली किरदार निभाती हैं। वे केंद्रीय भूमिका में नहीं होतीं। ‘डब्बा कार्टेल’ के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह एक ऐसी दुनिया है जिसे इस नजरिए से देखा जा रहा है कि महिलाएं इस स्थिति में खुद को कैसे पाती हैं और यह निश्चित ही पुरुषों के अलग है।’’
वर्ष 1999 में प्रदर्शित फिल्म ‘गॉडमदर’ में अपनी दमदार भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं अभिनेत्री ने कहा कि शिबानी अख्तर द्वारा निर्मित यह सीरीज अपराध की दुनिया को एक अलग नजरिए से दिखाती है।
‘नेटफ्लिक्स’ पर प्रसारित इस सीरीज में आजमी ने एक ठेठ गुजराती सास की भूमिका निभाई है जो बाद में एक ऐसी महिला के रूप में सामने आती है जो अतीत में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले माफिया से जुड़ी थी।
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आजमी ने कहा कि एक ऐसे चरित्र को गढ़ना दिलचस्प था जिसकी शक्ति उसकी शांत दृढ़ता में निहित है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस किरदार की कई परतें चुनौतीपूर्ण लगीं और मैंने पाया कि वह उस ‘गॉडमदर’ से अलग हैं जिसका किरदार मैंने कई साल पहले निभाया था और जिसके लिए मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।’’
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इस सीरीज में ज्योतिका और निमिषा सजयन, गजराज राव, अंजलि आनंद, साई ताम्हणकर, जिशु सेनगुप्ता, लिलेट दुबे और सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार भी हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह काल्पनिक कथाओं पर आधारित फिल्मों में महिलाओं को अब दमदार भूमिकाएं दिए जाने से खुश हैं, उन्होंने कहा कि यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था।