Operation Sindoor पर फिल्म बना रहे विवेक अग्निहोत्री हुए भावुक, बोले कहानी दुनिया तक पहुंचे, यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी

Operation Sindoor के एक साल होने पर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए भावुकता से अपने विचार रखें।

operation sindoor vivek agnihotri
operation sindoor vivek agnihotri | Image: PIB & X

देश जहां Operation Sindoor की पहली वर्षगांठ मना कर भारतीय सेना को सलाम और पहलगम आतंकी हमले में मरे हिंदुओं को श्रद्धांजलि दे रहा है। तो वहीं The Kashmir Files से कश्मीरी पंडितों का दर्द दुनिया को दिखाने वाले निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री अब ऑपरेशन सिंदूर पर फिल्म बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल होने पर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए भावुकता से अपने विचार रखें। उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें पहलगम आतंकी हमले और इसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर की बहुत झलकियां दिखाई गई हैं। 

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वीडियो में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान भी दिखा 

इस वीडियो में पीएम मोदी के ऐलान का भी जिक्र है जिसमें उन्होंने तब कहा था "टेरर और टॉक एक साथ नहीं हो सकते, टेरर और ट्रेड एक साथ नहीं चल सकते और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।" 

पोस्ट किए गए वीडियो के अंत में 'A Nation's Resolve Coming Soon' (एक राष्ट्र का संकल्प — जल्द आ रहा है) लिखा आता है।

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ऑपरेशन सिंदूर की कहानी दुनिया तक पहुंचे, यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने एक्स पर जवानों की बहादुरी को नमन किया और कहा कि उनकी ओर से सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि ऑपरेशन सिंदूर की कहानी दुनिया तक पहुंचे, ताकि भारत की रक्षा सेनाओं के बलिदान, जज्बे और आत्मा को हमेशा जिंदा रखा जा सके। 

फिल्म निर्माता ने लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर का एक साल, एक साल पहले भारत ने दुनिया को दिखाया था कि शांति हमारी प्रकृति है, लेकिन हमारी चुप्पी हमारी कमजोरी नहीं है। आज मैं नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी लीडरशिप, हमारी बहादुर सेना और हर उस भारतीय के जज्बे को नमन करता हूं, जो राष्ट्रीय संकल्प के उस पल में एकजुट होकर खड़ा रहा। और शायद सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम ऑपरेशन सिंदूर की कहानी दुनिया तक पहुंचाएं। सच्चाई के साथ। ताकत के साथ। ताकि दुनिया याद रखे कि क्या बचाया गया, क्या बलिदान दिया गया, और इंसानियत को जिंदा रखने की कितनी कीमत चुकाई गई। इतिहास युद्धों को याद रखता है। सभ्यताएं साहस को याद रखती हैं।"

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