अपडेटेड 6 February 2026 at 12:14 IST

Rajpal Yadav: राजपाल यादव को करना पड़ा तिहाड़ जेल में सरेंडर, कोर्ट से नहीं मिली राहत, जानिए पूरा मामला

Rajpal Yadav Surrender: राजपाल यादव की जेल से बचने की आखिरी कोशिश ठंडे बस्ते में चली गई जब दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

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Rajpal Yadav Surrender
Rajpal Yadav Surrender | Image: instagram

Rajpal Yadav Surrender: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर राजपाल यादव इन दिनों एक बड़े कानूनी पचड़े में फंसे हुए हैं। उनके खिलाफ चेक बाउंस का केस दर्ज है। इस बीच, उनकी जेल से बचने की आखिरी कोशिश ठंडे बस्ते में चली गई जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

बार एंड बेंच के अनुसार, राजपाल यादव अदालत की कार्यवाही में उपस्थित थे। अब एक्टर ने इस पुराने मामले में तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद राजपाल ने तय समयसीमा के अंदर गुरुवार शाम 4 बजे सरेंडर कर दिया। 

राजपाल यादव ने क्यों किया तिहाड़ जेल में सरेंडर?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव ने सरेंडर की समय-सीमा बढ़ाने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी ये रीक्वेस्ट खारिज कर दी। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। आपको बता दें कि ये मामला वित्तीय लेनदेन और चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत द्वारा पहले ही सजा सुनाई जा चुकी थी। हाई कोर्ट ने भी मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सजा पर रोक नहीं लगाई।

सामने आई जानकारी की माने को, एक्टर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और भुगतान पूरा करने के लिए एक हफ्ते का और समय चाहिए। उन्हें बुधवार शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने सरेंडर करने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था और कहा कि कोर्ट किसी इंसान को केवल उसका बैकग्राउंड देखकर स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दे सकता। 

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ANI के अनुसार, हाई कोर्ट ने पहले राजपाल यादव को दी गई रियायत वापस ले ली थी और उन्हें 4 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना है कि एक्टर ने समझौते की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए दिए गए वचनों का बार-बार उल्लंघन किया है।

राजपाल यादव से जुड़ा चेंक बाउंस केस क्या है?

आपको बता दें कि ये मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने डायरेक्टर के तौर पर अपनी पहली फिल्म 'अता-पता लापता' बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपए कर्ज के तौर पर लिए थे। फिल्म पिट गई जिसके बाद कर्ज की रकम लौटाने में देरी होती गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके दिए कई चेक बाउंस हुए। 

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पहले कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से राजपाल को कई नोटिस भेजे गए, लेकिन वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। राजपाल 3 से 6 दिसंबर 2013 तक जेल में भी रहे। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी थी। निचली अदालत ने राजपाल और उनकी पत्नी को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। एक्टर ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2024 में हाई कोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने को भी कहा और केस को मेडिएशन सेंटर भेजा गया।

राजपाल की तरफ से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि वह शिकायतकर्ता को 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे, जिसमें पहली किश्त 40 लाख की और दूसरी किश्त 2.10 करोड़ रुपए की शामिल थी। कोर्ट के अनुसार, तय समयसीमा में एक भी किश्त जमा नहीं की गई। इस पर एक्टर ने ड्राफ्ट में टाइपिंग की गलती का तर्क दिया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने जनवरी 2026 में एक्टर को अंतिम मौका दिया था, लेकिन बावजूद इसके अब तक भुगतान नहीं किया गया। 

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Published By : Sakshi Bansal

पब्लिश्ड 6 February 2026 at 12:14 IST