BREAKING: दिग्गज फिल्म निर्माता और CBFC के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन, लीवर समस्या के बाद 76 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी का निधन हो गया। उनकी उम्र 76 साल थी और वो लंबे समय से बीमार थे।
- मनोरंजन समाचार
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केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी का निधन हो गया। उनकी उम्र 76 साल थी और वो लंबे समय से बीमार थे। बताया जा रहा है निहलानी लीवर संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। आपको बता दें कि पहलाज निहलानी हिंदी फिल्म उद्योग के जाने माने निर्माताओं में शामिल थे।
उन्होंने आंखें, अंदाज, तलाश, जूली 2 और रंगीला राजा जैसी कई फिल्मों का निर्माण किया। वह 2015 से 2017 तक CBFC के अध्यक्ष भी रहे थे और अपने कार्यकाल के दौरान कई चर्चित फैसलों को लेकर सुर्खियों में रहे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है और कई कलाकारों व फिल्म हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने की मौत की पुष्टि
FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने पहलाज निहानी के निधन की पुष्टि की है। नवभारत टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा, 'यह इंडस्ट्री के लिए गहरा सदमा है। पहलाज जी की हार्ट अटैक से मौत हुई है।' जानकारी के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज स्थित श्मशान घाट में किया जा सकता है।
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पहलाज निहलानी भारतीय सिनेमा के उन निर्माताओं में से एक थे, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में कई व्यावसायिक और लोकप्रिय फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने अपने करियर में कई हिट और मास एंटरटेनर फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘गुनाहों का फैसला’, ‘पाप की दुनिया’, ‘मिट्टी और सोना’, ‘शोला और शबनम’ और ‘आंखें’ जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।
निहलानी को खासतौर पर कमर्शियल सिनेमा के लिए जाना जाता था। उनकी फिल्मों में एक्शन, ड्रामा और मनोरंजन का मजबूत मिश्रण देखने को मिलता था, जो उस दौर के दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। उन्होंने कई बड़े सितारों के साथ काम किया और उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन भी किया।
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बाद के सालों में उन्होंने फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड की कमान भी संभाली और CBFC के अध्यक्ष के रूप में काम किया। इस दौरान वे कई बार अपने सख्त फैसलों और नियमों को लेकर चर्चा में रहे। उनके कार्यकाल में सेंसरशिप को लेकर कई बहसें भी सामने आईं, जिससे वे लगातार सुर्खियों में बने रहे। फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान को याद करते हुए कई लोगों ने कहा कि वे ऐसे निर्माता थे जिन्होंने कमर्शियल सिनेमा की परंपरा को मजबूती दी। उनके निधन को हिंदी सिनेमा के एक युग के अंत के रूप में भी देखा जा रहा है।