लोकल ट्रेन से सीधे स्टारडम तक... 'हनुमान अंश' की सफलता के बाद मास्क पहनकर निकलने को मजबूर हुए शोभीनव सत्या; REPUBLIC EXCLUSIVE
हनुमान अंश फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी अभिनेता शोभीनव सत्या ने रिपब्लिक समिट में अपनी जीवनशैली और करियर में आए बड़े बदलावों पर चर्चा की। फिल्म की अभूतपूर्व सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह इस साधारण बजट की फिल्म ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। हनुमान की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है।
- मनोरंजन समाचार
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फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर चुकी है और सिनेमाघरों में इसका शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। फिल्म में नीम करोली बाबा का मुख्य किरदार निभाने वाले डेब्यू एक्टर शोभिनव सत्या इन दिनों सफलता के नए शिखर पर हैं। दर्शकों और समीक्षकों से मिली अपार सराहना के बीच, शोभिन ने हाल ही में मुंबई में आयोजित 'रिपब्लिक समिट' में आए। उनके साथ निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और सह-कलाकार चंदन आनंद भी मौजूद थे। इस सत्र के दौरान शोभिनव ने अपनी कास्टिंग यात्रा और रातों-रात बदली जिंदगी के दिलचस्प किस्से साझा किए।
कैमरे के पीछे से सीधे मुख्य भूमिका तक
शोभिनव का अभिनेता बनने का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें फिल्म में केवल एक असिस्टेंट डायरेक्टर सह-निर्देशक के तौर पर काम पर रखा गया था। शूटिंग के पहले ही दिन मुख्य अभिनेता अचानक बीमार पड़ गए, जिससे प्रोजेक्ट के बंद होने का खतरा मंडराने लगा। इस बड़े संकट से फिल्म को बचाने के लिए निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने शोभिन को ही मुख्य भूमिका सौंपने का बड़ा फैसला लिया।
दरअसल, इस फैसले की नींव कुछ दिन पहले एक सामान्य ऑफिस मीटिंग में पड़ी थी। शोभिन जब मीटिंग में थोड़ा देर से पहुंचे, तो विशाल डांटने ही वाले थे कि अचानक उनकी नजर शोभिनव पर पड़ी और उन्होंने कहा, 'यह तो बिल्कुल महाराज जी नीम करोली बाबा जैसा दिखता है।' जब पहले दिन संकट आया, तो विशाल का वही अवलोकन शोभिन के लिए वरदान साबित हुआ।
सिर्फ लुक नहीं, अभिनय में गहराई की मांग
चेहरे की समानता होना एक बात थी, लेकिन मुख्य किरदार में उतरने के लिए निर्देशक की पैनी नजरों के सामने खुद को साबित करना भी जरूरी था। शोभिन ने कहा, 'शुरुआत में मुझे लगा कि अगर मेरा अभिनय थोड़ा कम भी रहा, तो मेरा लुक काम संभाल लेगा। लेकिन शूटिंग शुरू होते ही विशाल सर की उम्मीदें बढ़ गईं। जब भी मुझे लगता कि शॉट ठीक है, वे उसमें और अधिक गहराई चाहते थे। उनकी इसी सख्ती और मेरी कड़ी मेहनत ने इस किरदार को यादगार बनाया।'
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300 करोड़ के बाद का जीवन, मास्क और स्टारडम का एहसास
सफलता के बाद अपनी बदली जिंदगी पर बात करते हुए शोभिन ने कहा, 'मैं रात को एक असिस्टेंट डायरेक्टर था और सुबह होते ही मुख्य अभिनेता बन गया। सिनेमा के इतिहास में ऐसा मोड़ शायद ही पहले कभी आया हो, यह सचमुच ईश्वर की कृपा है।'
अपनी नई प्रसिद्धि का एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि समिट में आने के लिए उन्होंने गोरेगांव से आसान रास्ता चुनते हुए लोकल ट्रेन से जाने का सोचा था। लेकिन फिर अचानक उन्हें याद आया कि अब वे आम इंसान की तरह सफर नहीं कर सकते और उन्हें कार ही लेनी पड़ेगी। उनके सह-कलाकार चंदन आनंद ने भी चुटकी लेते हुए बताया कि भीड़ से बचने के लिए शोभिन और विशाल को मास्क पहनकर गाड़ी से बाहर निकलना पड़ा, जो यह साबित करता है कि शोभिन अब स्टारडम के एक नए स्तर पर पहुंच चुके हैं।