West Champaran Lok Sabha Seat: तीन बार BJP ने लहराया जीत का परचम, गांधी के जीवन से जुड़ा है इतिहास
Lok Sabha Election 2024: पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट पर लगातार तीन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज की है।
- चुनाव न्यूज़
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West Champaran Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर चुनावी विगुल फूंका जा चुका है। सभी लोकसभा सीटों पर आगामी चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार के 40 लोकसभा सीटों में से आज हम बात करेंगे पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट की। बता दें, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण एक ही क्षेत्र के दो हिस्से हैं। दिलचस्प बात ये है कि वर्तमान में दोनों ही लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है।
चंपारण में दोनों सीटों का गठन 2009 में हुआ था। यहां पर 2009, 2014 और फिर 2019 में लोकसभा चुनाव हुए हैं। दो बार यहां पर भाजपा ने जीत का झंडा लहराया है। संजय जायसवाल ने लोकसभा चुनाव में यहां से लगातार तीन बार जीत हासिल की। इंदिरा गांधी के इमरजेंसी तक यहां पर कांग्रेस का कब्जा रहा है।
2019 में भाजपा ने भारी मतों से जीता चुनाव
11 अप्रैल 2019 को पश्चिमी चंपारण में लोकसभा चुनाव आयोजित किया गया, और 23 मई को परिणाम घोषित किया गया। इसमें भाजपा के पक्ष में 62.4 फीसदी वोट गए थे। भाजपा उम्मीदवार डॉ संजय जायसवाल को 6 लाख 3 हजार 706 वोट मिले थे। 59.6 फीसदी वोट के साथ ही उन्होंने पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की। वहीं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के बृजेश कुमार कुशवाहा को 30.6 फीसदी यानि 3 लाख 9 हजार 800 वोट मिले।
क्या रहा 2014 का परिणाम?
12 मई 2014 को पश्चिमी चंपारण में लोकसभा चुनाव आयोजित किया गया, और 16 मई को परिणाम घोषित किया गया। इसमें भाजपा के पक्ष में 44.4 फीसदी वोट गए थे। वहीं JDU को 31.2 फीसदी और RJD को 14.6 फीसदी वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार डॉ संजय जायसवाल को 3 लाख 71 हजार 232 वोट मिले थे। 43.4 फीसदी वोट के साथ उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की। वहीं जनता दल यूनाइटेड को 30.5 फीसदी वोट मिले। जदयू उम्मीदवार प्रकाश झा को 2 लाख 60 हजार 978 वोट मिले और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल को इस सीट पर 14.2 फीसदी वोट मिले। राजद उम्मीदवार रघुनाथ झा को 1 लाख 21 हजार 800 वोट मिले।
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पश्चिमी चंपारण में है 6 विधानसभा सीटें
इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुल 6 विधानसभा सीटें हैं- नौतन, चनपटिया, बेतिया, रक्सौल सुगौली और नरकटिया। पश्चिम चंपारण में स्थिति यह है कि भाजपा ने जदयू के साथ और जदयू के बिना, दोनों परिस्थितियों में जीत दर्ज की है। हालांकि, अगर जदयू ने NDA के साथ हाथ नहीं मिलाया होता तो इस बार राजद, जदयू और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार वाला हो सकता था।
यहीं से हुई थी गांधी के सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पश्चिमी चंपारण बेहद खास माना जाता है। राष्ट्रपिता कहे जाने वाले मोहनदास करम चंद्र गांधी ने यहीं से सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी।