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Updated May 27th, 2024 at 23:14 IST

कांग्रेस नेता एलनगोवन को गोमांस के बारे में गांधीजी को पढ़ना चाहिए: अन्नामलाई

अन्नामलाई ने कहा कि एलनगोवन का ‘गोमांस (बीफ) पर जोर देना’ दर्शाता है कि तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी किस हद तक गांधीजी की विचारधारा से दूर हो गई है।

Annamalai
अन्नामलाई | Image:PTI/File
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तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस नेता ई.वी.के.एस. एलनगोवन का ‘गोमांस (बीफ) पर जोर देना’ दर्शाता है कि तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी किस हद तक गांधीजी की विचारधारा से दूर हो गई है।

अन्नामलाई ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लोगों को अपनी इच्छानुसार कुछ भी खाने और चुनने का अधिकार है, लेकिन जब वे मेहमान के रूप में किसी विशेष स्थान पर जाते हैं तो वे दूसरों को एक विशेष प्रकार का भोजन तैयार करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

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तमिलनाडु कांग्रेस ने हाल ही में ओडिशा के मंदिर की चाबियों के संबंध में तमिलनाडु को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी के विरोध में यहां भाजपा मुख्यालय के सामने प्रदर्शन की घोषणा की थी। उसी पृष्ठभूमि में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने यह टिप्पणी की।

अन्नामलाई ने तब कहा था कि उनकी पार्टी प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराएगी और उन्हें द्रमुक और कांग्रेस द्वारा तमिलों के साथ ‘विश्वासघात’ पर एक किताब भी भेंट करेगी। इसके जवाब में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एलनगोवन ने तमिलनाडु भाजपा प्रमुख से गोमांस सहित मांसाहारी भोजन तैयार करने के लिए कहा।

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इस पर अन्नामलाई ने कहा, “हम प्रदर्शनकारियों को दोपहर का भोजन प्रदान करेंगे। अच्छा भोजन करें।”

गोमांस पर महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन करना चाहिए- अन्नामलाई

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उन्होंने कहा कि वे (कांग्रेस) किसी विशेष किस्म पर जोर नहीं दे सकते और एलनगोवन को एक बार गोमांस पर महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे आपको यह कहने का कोई अधिकार नहीं कि गोमांस मत खाइये। लेकिन, आप मुझे मजबूर नहीं कर सकते...आपको मुझे गोमांस पकाने के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं है।”

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भाजपा नेता ने आश्चर्य जताया कि क्या गोमांस पकाने की मांग रखना निरंकुश होना नहीं है।

जयललिता एक हिंदुवादी नेता थीं- अन्नामलाई

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अन्नामलाई ने कहा कि राज्य में हिंदुत्व शब्द को विकृत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जे. जयललिता एक हिंदुवादी नेता थीं। उन्होंने राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए उनके समर्थन को रेखांकित किया।

अन्नाद्रमुक के साथ इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार होने का उल्लेख करते हुए अन्नामलाई ने कहा, “जयललिता हिंदुत्व की प्रबल अनुयायी थीं।”

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पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अन्नाद्रमुक के किसी सदस्य को हिंदुत्व के बारे में संदेह है तो वे इस मामले में 1995 के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दे सकते हैं।

हिंदुत्व एक जीवन शैली है- अन्नामलाई

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न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा के उस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदुत्व एक जीवन शैली है। उन्होंने कहा, “सभी को साथ लेकर चलना हिंदुत्व है... केवल हिंदू धर्म पर निर्भर रहना हिंदुत्व नहीं है।” उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की उनकी परिभाषा शीर्ष अदालत के फैसले से उपजी है।

उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में, हिंदुत्व (शब्द) विकृत है...मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दे रहा हूं...हम जो कहते हैं वह यह है कि हम किसी के दुश्मन नहीं हैं।”

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जयललिता के हिंदुत्व नेता होने की अपनी हालिया टिप्पणी पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 1984 को जयललिता ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की मांग की थी।

इसे भी पढ़ें : चुनाव प्रचार में दिक्कत क्यों नहीं हो रही? केजरीवाल पर BJP ने उठाए सवाल

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Published May 27th, 2024 at 23:14 IST

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