BJP ने विधानसभा उपचुनाव के लिए जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, बडगाम सीट से आगा सैयद मोहसिन को मिला टिकट
बीजेपी ने जम्मू कश्मीर और झारखंड में विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करदी है। BJP ने बड़गाम से आगा सैयद मोहसीन और नगरौटा से देवयानी राणा को टिकट दिया है।
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By-Elections 2025 : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग राज्यों में अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। यह घोषणा पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा की गई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है।
पार्टी ने यह लिस्ट दिल्ली स्थिति राष्ट्रीय मुख्यालय से जारी की गई है। इस लिस्ट में चार राज्यों की कुल 5 विधानसभा क्षेत्रों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है। बीजेपी ने इन उम्मीदवारों का चयन उनकी स्थानीय सक्रियता, विकास-केंद्रित एजेंडे और पार्टी की विचारधारा के अनुरूप रखते हुए किया है।
राज्यवार उम्मीदवारों की सूची
- जम्मू-कश्मीर की बडगाम सीट से आगा सैयद मोहसिन और नागरोटा से देवयानी राणा को टिकट मिला है।
- झारखंड की घाटशिला (एसटी) से बाबूलाल सोरेन BJP प्रत्याशी होंगे।
- ओडिशा की नुआपाड़ा सीट से BJP ने जय धोलकिया को टिकट दिया है।
- तेलंगाना की जुबली हिल्स सीट पर लंकाला दीपक रेड्डी BJP के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
इन सीटों पर होंगे उपचुनाव
बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। 8 विधानसभा सीटों के उपचुनाव 11 नवंबर को होंगे और 14 नवंबर को बिहार विधानसभा के साथ परिणाम आएगा। जिन सीटों पर उपचुनाव होंगे उनमें राजस्थान की अंटा, जम्मू-कश्मीर की बडगाम और नागरोटा, पंजाब की तरणतारण, झारखंड की घाटशिला, तेलंगाना की जुबली हिल्स, मिजोरम की डांपा और ओडिशा की नुआपाड़ा सीट शामिल हैं।
उपचुनाव का कारण
- जम्मू और कश्मीर : बडगाम, उमर अब्दुल्ला का इस्तीफा
- नगरोटा: श्री देवेंद्र सिंह राणा की मौत
- राजस्थान: अंता, कंवरलाल की अयोग्यता
- झारखंड : घाटशिला (एसटी), रामदास सोरेन की मौत
- तेलंगाना : जुबिली हिल्स, मगंती गोपीनाथ की मौत
- पंजाब : तरन तरन, कश्मीर सिंह सोहल की मौत
- मिजोरम : दम्पा (एसटी), लालरिंत्लुआंगा सैला की मौत
- ओडिशा : नुआपाड़ा, श्री राजेंद्र ढोलकिया की मौत
ये उपचुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और मौजूदा सरकारों की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।