कौन हैं TMC सांसद सायनी घोष, जो गाने, शेरो-शायरी और अपने तेवर से बनी हुई हैं 'इंटरनेट सेंसेशन', कही जा रहीं ममता बनर्जी बनर्जी की उत्तराधिकारी
Saayoni Ghosh TMC Leader: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सायनी घोष का नाम आज चर्चा का विषय है। बंगाली फिल्म अभिनेत्री से TMC सांसद बनीं सायनी अपनी आक्रामक भाषण शैली, गानों और जमीनी जुड़ाव के कारण ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानी जा रही हैं।
- चुनाव न्यूज़
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Saayoni Ghosh TMC Leader: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक चेहरा सबसे तेजी से उभरकर सामने आया है, और वह है सायनी घोष का। बंगाली फिल्मों की ग्लैमरस दुनिया से निकलकर संसद की गलियारों तक पहुंचने वाली सायनी घोष आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) का वह चेहरा बन गई हैं, जिनके भाषणों, गानों और बेबाक तेवरों के बिना ममता बनर्जी की रैलियां अधूरी-सी लगने लगी हैं।
सोशल मीडिया पर उनकी वायरल होती रील, मंच से गाए जाने वाले लोकगीत और BJP के खिलाफ उनकी आक्रामक शेरो-शायरी ने उन्हें बंगाल का 'इंटरनेट सेंसेशन' बना दिया है। कभी ममता बनर्जी के एक फोन कॉल पर अपना फिल्मी करियर छोड़कर चुनावी मैदान में उतरने वाली सायनी आज ममता और अभिषेक बनर्जी की सबसे भरोसेमंद साथी और युवा कार्यकर्ताओं के बीच प्रेरणा का स्रोत मानी जाती हैं।
ममता के एक फोन कॉल पर सयानी ने ली राजनीति में एंट्री
बता दें, सायनी घोष का राजनीतिक उदय किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। क्योंकि साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब BJP बंगाल में बड़ी चुनौती पेश कर रही थी, तब सायनी ने अभिनय की चकाचौंध से बाहर निकलकर राजनीति में एंट्री ली।
दरअसल, हुआ कुछ यूं कि साल 2021 का विधानसभा चुनाव बड़ा हाहाकारी हो रहा था। माना जा रहा था कि 2019 में धमाका कर चुकी BJP ममता को हराकर सत्ता में आ जाएगी, लेकिन तभी बंगाली फिल्मों की ग्लैमरस स्टार एक्ट्रेस सयानी घोष को ममता बनर्जी का एक फोन कॉल आता है और सयानी ने न आव देखा न ताव, मेकअप वैन छोड़ी और सीधे चुनावी मैदान में उतर गईं। ग्लैमर की दुनिया से इस 'इंस्टेंट शिफ्ट' ने पूरे बंगाल का ध्यान अपनी ओर सबका ध्यान खींचा था।
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सायनी की फाइटिंग स्पिरिट ने जीता ममता बनर्जी का दिल
हालांकि, आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी फाइटिंग स्पिरिट ने ममता बनर्जी का दिल जीत लिया। दिलचस्प है कि चुनाव हारने के बाद भी सायनी ने मैदान नहीं छोड़ा और उन्हें तुरंत TMC की युवा इकाई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी के पावर सेंटर में जगह दी गई। उनकी मेहनत रंग लाई और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जो कभी खुद ममता बनर्जी का चुनावी क्षेत्र हुआ करता था।
राजनेता के साथ-साथ गायिका होने का लाभ
उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका आम जनता से जुड़ने का अनूठा तरीका है। सायनी सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि एक कुशल गायिका भी हैं। अपने चुनावी प्रचार के दौरान मंच से लोकगीत गाना, कभी 'हृदय माझे काबा और नयने मदीना' जैसे गीतों के माध्यम से मतदाताओं के बीच माहौल बनाना, उनके व्यक्तित्व के अलग पहलू को दिखाता और इससे इंटरनेट के युग में अपनी उनकी ओर लोगों का ध्यान भी आकर्षित होता है।
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जहां उनके समर्थक इसे जमीन से जुड़ाव और समावेशी राजनीति मानते हैं, वहीं विपक्षी दल BJP इसे मुस्लिम तुष्टीकरण का नाम देकर उन पर निशाना साधती रही है। इन विवादों और आलोचनाओं के बावजूद सायनी अपने तेवरों में कोई कमी नहीं आने देतीं। संसद से लेकर बंगाल की गलियों तक, महंगाई से लेकर मोदी-शाह पर तीखे कटाक्ष करने तक, सायनी का अंदाज जनता को अपनी ओर खींचता है।
विवादों से घिरा रहा है सयानी का राजनीतिक सफर
हालांकि सायनी का राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। करियर के शुरुआती दौर में पुराने ट्वीट को लेकर हुआ विवाद हो या फिर शिक्षक भर्ती घोटाले में ED की लंबी पूछताछ, उन्होंने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद, उनका जनाधार कम होने के बजाय बढ़ा है।
यही कारण है कि आज 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें ममता बनर्जी की संभावित उत्तराधिकारी या TMC का भविष्य बताया जा रहा है। उनकी संसद में दी गई तेज-तर्रार दलीलें और बंगाल की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ यह बताती है कि सायनी घोष अब केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति का वह 'पावर सेंटर' बन चुकी हैं।