अपडेटेड 18 March 2026 at 22:22 IST

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में भवानीपुर सीट बनी हॉट, CM ममता के खिलाफ BJP के सुवेंदु अधिकारी ठोक रहे ताल, किसका पलड़ा भारी?

West Bengal Election 2026: बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC की मुखिया ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया है। यही शुभेंदु 2021 में नंदीग्राम से ममता को हरा चुके हैं। आइए जानते हैं, इस हॉटसीट से किसका पलड़ा है ज्यादा भारी?

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West Bengal Election 2026 Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari
West Bengal Election 2026 Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari | Image: Republic

West Bengal Election 2026 Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर वही खींचतान देखने को मिल रही है, जिसने 2021 में पूरे देश का ध्यान खींचा था। इसी के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने CM ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर में घेरने के लिए सुवेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाकर नया चक्रव्यूह रचा है। 

बता दें, यह वही सुवेंदु अधिकारी हैं जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की सीट पर ममता बनर्जी को मात दी थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सुवेंदु कोलकाता के भवानीपुर में भी वही करिश्मा दोहरा पाएंगे या फिर ममता बनर्जी अपने इस अभेद्य किले को बचाने में कामयाब रहेंगी?

क्या बदल रहा है भवानीपुर का समीकरण?

भवानीपुर सीट को पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है। साल 2011 से अब तक हुए कुल 8 चुनावों में से 7 बार यहां TMC का ही दबदबा रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि यहां मुकाबला धीरे-धीरे कड़ा होता जा रहा है। 

जहां 2021 के चुनाव में TMC की जीत का अंतर करीब 28,000 वोटों का था, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह फासला घटकर केवल 8,297 रह गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि BJP ने भवानीपुर के आधे से ज्यादा बूथों पर बढ़त हासिल की थी। ये घटते आंकड़े BJP के लिए उम्मीद की किरण बताई जा रही हैं।

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ममता को उनके ही घर में घेरने की तैयारी

बता दें, सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर से चुनाव लड़ाने के पीछे BJP की एक बहुत गहरी रणनीति है। क्योंकि ममता भवानीपुर से तीन बार की विधायक हैं। 2021 में सुवेंदु से नंदीग्राम में हारने के बाद उन्होंने CM बने रहने के लिए यही सीट चुनी। अब जानकारों का मानना है कि BJP चाहती है कि ममता बनर्जी अपनी खुद की सीट बचाने में इतनी व्यस्त हो जाएं कि उन्हें पूरे राज्य में प्रचार करने का समय ही न मिले। 

नंदीग्राम की हार की टीस अभी भी कहीं न कहीं ताजा है, और सुवेंदु जैसा प्रतिद्वंद्वी सामने होने पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। BJP का यह दांव ठीक वैसा ही है जैसा उन्होंने पहले दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कद्दावर नेता और पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा को उतारकर किया था। 

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नंदीग्राम में भी ममता और शुभेंदु आमने-सामने 

ऐसे में ममता के खिलाफ सुवेंदु रणनीति के तहत दो सीटों- नंदीग्राम और भवानीपुर से लड़ रहे हैं। 2021 में उन्होंने ममता को नंदीग्राम से 1956 वोटों से हराया था। इस जीत ने BJP को बंगाल में मजबूत आधार दिया और सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता बने। ऐसे में नंदीग्राम सीट भी दोनों पार्टियों के लिए काफी अहम है। 

बताया जा रहा है कि अगर सुवेंदु अधिकारी हार जाते हैं, तो यह BJP के लिए एक झटका होगा। लेकिन, अगर ममता बनर्जी हार जाती हैं, तो यह बंगाल की मुख्यमंत्री के लिए लगातार दूसरा झटका होगा। साथ ही, नंदीग्राम वही जगह है, जहां से ममता बनर्जी ने CPM को सत्ता से हटाने के लिए अपना चुनावी अभियान शुरू किया था।

भवानीपुर की डेमोग्राफी और वोट बैंक 

बता दें, भवानीपुर की डेमोग्राफी यानी यहां की आबादी का ढांचा इस लड़ाई को और भी रोचक बनाता है। यहां लगभग 40 फीसदी बंगाली वोटर हैं, जबकि उतनी ही संख्या में गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और बिहारी समुदाय के लोग रहते हैं। इसके अलावा 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। बीजेपी की नजर खासतौर पर उन गैर-बंगाली कारोबारी समुदायों पर है, जिनका झुकाव अक्सर केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की ओर रहता है। 

दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने भी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जैन मंदिरों को जमीन देने और हिंदी में भाषण देने जैसे कदम उठाकर इन समुदायों को साधने की पूरी कोशिश कर रही हैं।

मतदाता सूची में सुधार के बाद BJP भारी?

हालांकि इस चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR ने राज्य में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भवानीपुर से करीब 47,000 नामों को हटाया गया है, जिस पर TMC ने कड़ा विरोध जताया है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का आरोप है कि यह उनके समर्थकों के नाम काटने की एक साजिश है। हालांकि, चुनाव आयोग (ECI) का तर्क है कि ये नाम डुप्लीकेसी या लोगों के वहां न रहने की वजह से हटाए गए हैं। 

वोटों का यह जोड़-घटाव हार-जीत के अंतर को पूरी तरह बदल सकता है, इसलिए दोनों ही पार्टियां अब एक-एक वोट की गिनती पर पैनी नजर रख रही हैं। ऐसे में अभी कुछ भी कहना मुश्किल है कि किस पार्टी का पलड़ा ज्यादा भारी है। लेकिन पुराने आंकड़ों पर नजर डालें, तो भवानीपुर में TMC… वहीं नंदीग्राम में BJP भारी नजर आ रही है। 

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 18 March 2026 at 22:22 IST