West Bengal Voting: बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में भी टूटा मतदान का रिकॉर्ड, 91.41 प्रतिशत वोटिंग दर्ज
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में भारी मतदान हुआ है। 142 सीटों पर जनता ने बढ़-चढ़कर वोट डाला, अब बस 4 मई को नतीजे आने का इंतजार है। जानें कुल कितने प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई? देखें ताजा अपडेट।
- चुनाव न्यूज़
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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के लिए बुधवार (29 अप्रैल) को मतदान हुआ। राज्य की 142 सीटों पर हुए इस मतदान में मतदाताओं का भारी उत्साह देखने को मिला। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में लगभग 91.41% मतदान दर्ज किया गया, जो लोकतंत्र के प्रति बंगाल की जनता की गहरी आस्था को दर्शाता है।
राज्य के 7 जिलों में फैले 142 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें देखी गईं। मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हालांकि, कुछ क्षेत्रों से छिटपुट झड़पों और तकनीकी खराबी की खबरें सामने आईं, जिन पर चुनाव आयोग की टीमों ने त्वरित कार्रवाई की।
भबानीपुर सीट से ममता बनर्जी हैं उम्मीदवार
इनमें से सबसे चर्चित सीटों में भबानीपुर शामिल है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जहां वे भाजपा के मौजूदा विधायक हैं। इस चरण में 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाओं और 792 तृतीय-लिंग के मतदाताओं समेत कुल 3,21,73,837 मतदाता मतदान के पात्र हैं। पहले चरण में 152 सीट पर चुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, जिसमें रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
चुनाव आयोग ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
दूसरे चरण के मतदान के लिए बंगाल चुनाव आयोग ने सुरक्षा के सख्त प्रबंध किए थे। दूसरे चरण के चुनाव के लिए 41,001 मतदान केंद्र स्थापित किए गए, सभी मतदान केंद्रों की गतिविधियों का वेबकास्टिंग के माध्यम से प्रसारण किया गया। निर्वाचन आयोग ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की और 7 जिलों में केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियों को तैनात किया गया, कुल 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए कैमरों से लैस ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया, साथ ही कोलकाता में केंद्रीय बलों की 273 कंपनियों के साथ सबसे ज्यादा तैनाती की गई।