BREAKING: बंगाल से बड़ी खबर, CM पद के लिए इस नेता के नाम पर लगी मुहर; बस थोड़ी देर में होगा औपचारिक ऐलान

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिकी हैं।

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 Suvendu Adhikari
Suvendu Adhikari | Image: PTI

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिकी हैं। सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक CM पद के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम तय कर लिया गया है। बस थोड़ी देर में इस नाम का औपचारिक ऐलान होना है। शुभेंदु अधिकारी के अलावा दो डिप्टी सीएम को भी पद और गोपनीयता की शपथ कल दिलाई जाएगी। इसमें अग्निमित्रा पॉल रूपा गांगुली का नाम सबसे आगे है।

आपको बता दें कि कोलकाता के बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में थोड़ी देर बाद बंगाल के नव-निर्वाचित बीजेपी विधायक दल की बैठक होने जा रही है। इसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचने वाले है। वो होटल से निकल चुके हैं। जबकि शुभेंदु अधिकारी पहुंच चुके है। इसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो कल सीएम पद की शपथ लेंगे। इससे पहले, शुभेंदु अधिकारी ने नव-निर्वाचित विधायकों के साथ मुलाकात की।

शुभेंदु ही क्यों बनेंगे बंगाल के मुख्यमंत्री?

बंगाल में शुभेंदु अधिकारी एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक बार नहीं 2-2 बार TMC सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया। 2021 में नंदीग्राम में हराया और इस बार ममता के गढ़ भवानीपुर में जाकर दीदी को मात दी। इसके बाद शुभेंदु की दावेदारी और मजबूत हो गई।
शुभेंदु अधिकारी बीजेपी की जीत के आर्किटेक्ट भी माने जाते हैं, जिन्होंने बीजेपी का आंकड़ा 207 तक पहुंचा दिया। वो नेता प्रतिपक्ष रहे हैं इसलिए प्रशासनिक अनुभव भी है। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के भरोसेमंद भी हैं और बीजेपी नेता भी कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री वही बनेगा जो हिंदू हृदय सम्राट होगा

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शुभेंदु अधिकारी अविवाहित हैं। उनका जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में हुआ था। उनका परिवार भी राजनीति से जुड़ा था। उनके पिता शिशिर अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाने-माने नाम थे। शुभेंदु अधिकारी पर भी अपने पिता का प्रभाव पड़ा। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1989 में कांग्रेस की छात्र परिषद से की।

साल 1995 में वह उस वक्त चर्चा में आए, जब कांथी नगर पालिका में उन्हें पार्षद चुना गया। साल 1998 में जब टीएमसी की शुरुआत हुई तो सुवेंदु तृणमूल कांग्रेस से जुड़ गए। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीति पर पकड़ बना ली और वह इतने मजबूत हो गए कि साल 2014 में मोदी लहर के बावजूद अपनी लोकसभा सीट जीते। ममता बनर्जी ने भी उनका लोहा माना और परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए।

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Published By :
Ankur Shrivastava
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