Assam Election: 'कांग्रेस की वजह से हिमंता बिस्वा सरमा आज CM हैं, यहां मुसलमानों को...',विपक्ष पर बरसे AIMIM चीफ ओवैसी, जनता से की ये अपील
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा को रोकने में नाकाम साबित हो चुकी है। इसी वजह से ही आज हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा असम की सत्ता में है।
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असम विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचार-प्रसार जोर-शोर से जारी है। सभी दल ने जनता को लुभाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पार्टियों का स्टार प्रचारक भी मैदान है। इसी कड़ी नें AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी गुरुवार को असम पहुंचे। वो AIUDF पार्टी को समर्थन देने और जनता से वोट की अपील के लिए प्रदेश के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने BJP और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने असम विधानसभा चुनाव पर कहा, "हम दो दिनों के लिए AIUDF पार्टी के समर्थन में असम दौरे पर हैं। हमारा मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री होने से असम में नफरत की राजनीति चल रही है। कांग्रेस पार्टी भाजपा को रोकने में नाकाम साबित हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी की वजह से ही आज हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा सत्ता में है।
असम में मुसलमानों का घर तोड़ा गया-ओवैसी
वहीं, सीएम हिमंता पर बरसते हुए ओवैसी ने कहा, "असम में 50 हजार से ज्यादा मुसलमानों के घरों को तोड़ा गया, उन्हें बेघर कर दिया गया। ऐसे में बहुत जरूरी है कि बदरुद्दीन अजमल का समर्थन किया जाए ताकि उन लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।"
गुवाहाटी में धुआंधार प्रचार करेंगे ओवैसी
ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को गुवाहाटी में रहेंगे। जहां वे कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, वे कुल आठ से ज्यादा रैलियां या बैठकें करेंगे, जिनका मुख्य फोकस अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करना और खासतौर पर बदरुद्दीन अजमल का समर्थन जुटाना है। अजमल इस बार बिन्नाकांडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
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मैदान में AIMIM के उम्मीदवार नहीं
बता दें कि ओवैसी ने इस बार असम में अपनी पार्टी एआईएमआईएम का कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन वे राज्य में जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं। वह ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में वोट मांग रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में एआईयूडीएफ कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा था और 16 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन कांग्रेस ने इस बार अजमल का साथ छोड़ दिया।