Rudram-II Missile Test: भारत ने रुद्रम-II का किया सफल परीक्षण, पलक झपकते दुश्मन का टारगेट हो जाएगा तबाह; जानें इसकी बड़ी खासियत
Rudram-II Missile Test: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और वायुसेना ने स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-II का सफल परीक्षण किया है। रुद्रम-II मिसाइल हवा से सतह पर मार करने में बेहद सक्षम है।
- डिफेंस न्यूज
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Rudram-II Missile Test: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने साथ मिलकर हवा से सतह पर मार करने वाली आधुनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम-2' (Rudram-II) का सफल परीक्षण किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस अत्याधुनिक मिसाइल का परीक्षण लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) के जरिए किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल ने तय लक्ष्य को बेहद सटीक तरीके से निशाना बनाया। इस सफल परीक्षण को देश में रक्षा क्षेत्र में बेहद ही बड़ा कदम माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इन सफल उड़ान परीक्षणों के लिए DRDO, IAF, DPSUs, DcPPs और उद्योग जगत के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
रुद्रम-II मिसाइल की खासियत
- रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण भारतीय वायुसेना के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है। रुद्रम-II पूरी तरह से एक स्वदेशी एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है।
- इस अत्याधुनिक मिसाइल को दुश्मन के रडार का काल माना जा रहा है। इस मिसाइल के माध्यम से दुश्मन के सर्विलांस रडार, ट्रैकिंग सिस्टम और कम्युनिकेशन टावरों से निकलने वाले सिग्नलों को पकड़कर उन्हें हवा में ही नष्ट किया जा सकता है।
- ये परीक्षण बेहद कठिन परिस्थितियों में और महत्वपूर्ण प्रक्षेपवक्र (trajectory) के साथ किए गए, जहाँ इसने शत-प्रतिशत सटीकता दिखाई।
- इस अत्याधुनिक मिसाइल की मारक क्षमता करीब 300 से 350 किलोमीटर की बताई जा रही है। इसका मतलब यह 300 से 350 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मनों के ठिकानों को तबाह कर सकती है ।
- रुद्रम-II के सफल परीक्षण से सुखोई-30 एमकेआई की भी ताकत बढ़ गई है। रुद्रम-II मिसाइल को सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) से परीक्षण किया गया, जिसके चलते इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
- रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इन सफल उड़ान परीक्षण को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम को बताया। उन्होंने इस कामयाबी पर DRDO और वायुसेना को बधाई देते हुए इसे मील का पत्थर बताया है।
परीक्षण में कई संस्थाओं ने दिया साथ
मिली जानकारी के अनुसार Rudram-II को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की मुख्य प्रयोगशाला के रूप में, अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं जैसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL), आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) और ITR के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किया है। विकास-सह-उत्पादन भागीदारों (DcPPs) के साथ-साथ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), सैन्य विमान योग्यता के लिए क्षेत्रीय केंद्र (RCMA), मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी (MSQAA) और कई अन्य उद्योगों जैसी एजेंसियों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।