अपडेटेड 17 January 2026 at 07:32 IST

देश का सबसे बड़ा रक्षा सौदा! फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा भारत, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की छाती पर दली थी मूंग

रक्षा खरीद बोर्ड ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी। इसकी लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये। भारत के पास पहले से 36 राफेल हैं। इस डील के तहत अधिकांश विमान भारत में बनेगे।

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India to buy 114 Rafale fighter jets from France in India's biggest defence deal
फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा भारत | Image: ANI

India Defence Deal : भारत सरकार लगातार सेना की ताकत को मजबूत कर रही है। भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा खरीद बोर्ड (डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड - DPB) ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या और पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होने जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये (करीब 36 अरब अमेरिकी डॉलर) है। यह डील भारतीय वायुसेना (IAF) को मजबूत करेगा।

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फरवरी में हो सकती है डील

रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने रखा जाएगा। DAC की मंजूरी के बाद यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगा। CCS से हरी झंडी मिलने के बाद यह सौदा जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। संभावना है कि फरवरी 2026 में प्रस्तावित भारत-फ्रांस शिखर बैठक के दौरान समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं।

भारत में तैयार होंगे राफेल

यह डील भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक मानी जा रही है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि यह सौदा मेक इन इंडिया पहल के तहत होगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी। योजना के अनुसार 12 से 18 विमान फ्लाई-अवे स्थिति में सीधे फ्रांस से मिलेंगे। बाकी विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में बनेगा, जिसमें शुरुआत में लगभग 30% स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। भविष्य में यह हिस्सा और बढ़ सकता है।

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पाक की छाती पर दली मूंग

ऑपरेशन सिंदूर राफेल लड़ाकू विमानों के लिए ऐतिहासिक था, क्योंकि पहली बार भारतीय वायुसेना ने इन 4.5 पीढ़ी के मल्टी-रोल फाइटर जेट्स को वास्तविक युद्ध में बड़े पैमाने पर तैनात किया। अंबाला एयरबेस से उड़ान भरने वाले राफेल स्क्वाड्रन ने मुख्य भूमिका निभाई। राफेल ने SCALP क्रूज मिसाइलें (लंबी दूरी वाली स्टैंड-ऑफ हथियार) और HAMMER (AASM) प्रिसिजन-गाइडेड मुनिशन से हमले किए। इन हथियारों की वजह से भारतीय विमानों को पाकिस्तानी सीमा में घुसने की जरूरत नहीं पड़ी, और हमले बेहद सटीक रहे।

राफेल का उन्नत सिस्टम स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट पाकिस्तानी रडार, F-16 विमानों और उनकी AMRAAM/PL-15 मिसाइलों को जाम कर नाकाम करने में सफल रहा। इससे राफेल को स्टेल्थ-लाइक सुरक्षा मिली और दुश्मन के हमलों से बचाव हुआ। हवा से हवा, हवा से जमीन और टोही मिशन एक साथ निभाने की क्षमता के कारण राफेल ने ऑपरेशन को बेहद प्रभावी बनाया।

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भारत के पास 36 राफेल विमान

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमान सक्रिय हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल-मरीन वैरिएंट का ऑर्डर दिया है। अगर यह नया सौदा पूरा होता है, तो कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान भारत के पास होंगे। यह संख्या वायुसेना की परिचालन क्षमता को काफी मजबूत करेगी, खासकर पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे को देखते हुए।

राफेल को चुनने के पीछे भी कई कारण हैं। पहले से मौजूद बेड़े के साथ संगतता, कम रखरखाव खर्च, युद्ध क्षमता और फ्रांस के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी। यह कदम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भी बड़ा योगदान देगा। अंतिम मंजूरी के बाद यह डील न केवल वायु रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 17 January 2026 at 07:31 IST