Tata Group: AGM से ठीक 6 दिन पहले एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, कारोबार जगत को लगा बड़ा झटका, जानिए क्या रही वजह
Tata Sons Chairman Resign: बुधवार के दिन कारोबार जगत को एक बड़ा झटका लगा जब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अचानक अपने चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल अभी शेष है और इस कारण वो अगले वर्ष फरवरी 2027 तक अपने इस पद पर बने रहेंगे।
- बिजनेस न्यूज
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Tata Sons Chairman Resign: बुधवार के दिन कारोबार जगत को एक बड़ा झटका लगा जब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अचानक अपने चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल अभी शेष है और इस कारण वो अगले वर्ष फरवरी 2027 तक अपने इस पद पर बने रहेंगे। इस ऐलान के बाद टाटा ग्रुप के शेयर करीब 5 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।
क्यों दिया इस्तीफा
गौरतलब है कि इसी महीने 18 अगस्त को टाटा ग्रुप की वार्षिक आम बैठक (AGM) का आयोजन होना है। इस कारण AGM से ठीक पहले इस्तीफा देना यह उन अफवाहों को यकीन में बदलता है कि चंद्रशेखरन और टाटा ग्रुप में पिछले कुछ समय से मतभेद चल रहे हैं। हालांकि उनका कार्यकाल (फरवरी 2027) को पूरा करेंगे। यह भी बताया जा रहा है कि वह दोबारा इस नियुक्ति के लिए मांग नहीं करेंगे।
ऐसी उम्मीद की जा रही थी टाटा ग्रुप इस AGM में चंद्रशेखरन को एक्सटेंशन प्रदान करेगी जिससे वो इस पद पर अगले कुछ और साल बने रहेंगे। लेकिन टाटा और चंद्रशेखरन के बीच बढ़ते मतभेद के बीच इस्तीफे की घोषणा कर दी गई।
2017 में संभाला चेयरमैन का पद
एन चंद्रशेखरन को सन 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल किया गया था। इसके बाद सन 2017 में उन्हें टाटा संस बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
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इस्तीफे के बाद क्या बोले
एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफे देने के ऐलान के बाद अपना एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने कहा “टाटा ग्रुप के साथ 40 साल से जुड़ा हूं। टाटा में योगदान देने का अवसर मिलने के लिए मैं आभारी हूं। बीते एक दशक से मैं टाटासंस का नेतृत्व कर रहा हूं, जो मेरे लिए सम्मान और गहरी जिम्मेदारी की बात रही है। टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराजी टाटा ट्रंस और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा और सिफारिश की है। इसके बाद उनका यह प्रस्ताव 26 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया। हालांकि बोर्ड के एक सदस्य की ओर से समर्थन नहीं देने की वजह से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। सर्वसम्मति नहीं मिलने की स्थिति में मैंने इस फैसले का विकल्प चुना।”
चंद्रशेखरन ने आगे कहा कि उस बोर्ड की बैठक को 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं हो पाया है। टाटा संस बहुत बड़ा संस्थान है जहां कई बड़े प्रोजेक्ट्स अभी महत्वपूर्ण चरण में हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि बोर्ड नए नेतृत्व के लिए जल्द किसी को नियुक्त करने का फैसला करें।
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