PM मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद मार्केट में गिरावट का दौर जारी, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा, निवेशकों का 10 लाख करोड़ एक दिन में स्वाहा
12 मई 2026 को शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 1456 अंक टूटकर 74,559 पर और निफ्टी 436 अंक गिरकर 23,380 पर बंद हुआ। निवेशकों को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
- बिजनेस न्यूज
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12 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1456 अंक गिरकर 74,559 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 436 अंक टूटकर 23,380 पर रहा। इस गिरावट के कारण निवेशकों को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार में हुई इस भारी गिरावट के पीछे कई जगह हैं। इस सुनामी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे। जिसमें ईरान-अमेरिका तनाव और पीएम मोदी की अपील का असर भी शामिल है।
ईरान-अमेरिका तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम की स्थिति को बेहद नाजुक बताया। हॉर्मुज की खाड़ी लंबे समय तक बंद रहने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 2.45% बढ़कर 106.75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
पीएम मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट को देखते हुए जनता से अपील की थी कि अगले एक साल तक सोना न खरीदें, घर से काम करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें और लोकल प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें। इस अपील के बाद ज्वेलरी और रियल एस्टेट से जुड़े शेयरों में लगातार बिकवाली देखी गई।
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सेक्टरों का प्रदर्शन
आईटी कंपनियों में 3.5% से ज्यादा की गिरावट आई। ओपनएआई की नई कंपनी से जुड़े ऐलान ने भी बाजार पर असर डाला। आईटी, मेटल (कुछ को छोड़कर), ऑटो और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। निफ्टी बैंक करीब 884 अंक टूटा। पीएसयू बैंक और कुछ तेल एवं गैस कंपनियां अपवाद रहीं। रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया।
निवेशकों के लिए सलाह
यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक तेल संकट और क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी है। स्थिति सामान्य होने पर बाजार में रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। बाजार में इस तरह की अस्थिरता राजनीतिक घटनाओं के कारण आम है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शॉर्ट टर्म में घबराकर फैसला न लें। लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छी कंपनियों में SIP के जरिए निवेश जारी रखना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से जरूर सलाह लें।