BRICS देशों के साथ भारत का निर्यात 200 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है, एसोचैम ने रिपोर्ट में किया बड़ा दावा
ASSOCHAM ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी सेंटर की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में BRICS के साथ भारत का व्यापार काफी बढ़ा है। लेकिन 2030 तक भारत का निर्यात ब्रिक्स देशों के साथ 200 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है।
- बिजनेस न्यूज
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ASSOCHAM ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी सेंटर की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में BRICS के साथ भारत का व्यापार काफी बढ़ा है। भारत का व्यापार यह 2020-21 में USD 203 बिलियन से बढ़कर 2025-26 में USD 417 बिलियन हो गया है। एसोचैम ने “The Rise of BRICS Nations: An opportunity to scale Indian Exports to USD 200 Bn to BRICS by 2030” के नाम से एक रिपोर्ट तैयार की है।
2030 तक निर्यात 200 बिलियन
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में BRICS सदस्य देशों के सामान के व्यापार में ज़बरदस्त प्रदर्शन देखा गया, जो वैश्विक बाज़ारों में उनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। 2025-26 में BRICS सहयोगी देशों को भारत का निर्यात 96 बिलियन डॉलर था।
एसोचैम का मानना है कि बेहतर 'साउथ-साउथ सहयोग' (विकासशील देशों के बीच सहयोग) के साथ 2030 तक भारत का निर्यात ब्रिक्स देशों के साथ 200 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। इसके पीछे का कारण यह है कि भारत को पारंपरिक बाज़ारों से आगे बढ़कर निर्यात में विविधता लाने का अवसर मिलता है।
इन क्षेत्रों में हो सकता है लाभ
भारतीय कंपनियों को इंजीनियरिंग के सामान, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल और कपड़े, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिनरल्स और मेटल प्रोडक्ट्स, रत्न और आभूषण, कृषि और समुद्री उत्पाद, रिन्यूएबल एनर्जी, हेल्थकेयर और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में लाभ हो सकता है।
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अवसर अधिक निर्यात करने का
व्यापार की गतिशीलता कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें BRICS+ देशों का आर्थिक प्रदर्शन, उनकी व्यापार नीतियां और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य शामिल हैं। भारत के लिए अवसर न केवल BRICS+ देशों को अधिक निर्यात करने का है, बल्कि अपने प्रोडक्शन, सोर्सिंग और वैल्यू चेन, टेक्नोलॉजी, सेटलमेंट सिस्टम आदि को मज़बूत करने का भी है। इसके साथ ही इन अर्थव्यवस्थाओं में विकसित सर्वोत्तम प्रथाओं (Practices) और इकोसिस्टम से सीखने का भी है।
चुनौतियों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता
उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों (2021-26) के दौरान 7% से अधिक की औसत GDP वृद्धि दर्ज की। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वृद्धि दर्ज की। सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में, भारत इस समूह के दायरे को बढ़ाने और वैश्विक भू-राजनीतिक (Geo Political) और आर्थिक घटनाक्रमों से उत्पन्न चुनौतियों को हल करने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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व्यापार और सीमा-पार निवेश को मिलेगा बाल
ASSOCHAM के प्रेसिडेंट निर्मल के. मिंडा ने कहा कि BRICS फ्रेमवर्क के तहत व्यापार और सीमा-पार निवेश को बढ़ाने के लिए हाल ही में शुरू की गई पहल कई तेज़ी से बढ़ने वाले सेक्टर में एक अहम उत्प्रेरक (catalyst) का काम करेंगी। मिंडा ने कहा कि BRICS के संस्थापक सदस्य के तौर पर, भारत ने अपनी रणनीतिक नीतिगत पहलों के ज़रिए पिछले कुछ सालों में मज़बूती दिखाई है और सदस्य देशों के साथ संतुलित नज़रिए से व्यापार, निवेश, बातचीत और संबंधों को बेहतर बनाया है।
निर्मल के. मिंडा ने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक (Geo Political) बदलावों के दौर में भी व्यापारिक सहयोग ज़रूरी बना हुआ है। सहयोग का स्वरूप अभी भी विकसित हो रहा है, और BRICS के बीच मज़बूत व्यापारिक सहयोग से भारत की अहम खनिजों, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और पूंजी तक पहुँच बेहतर हो सकती है, साथ ही मैन्युफैक्चरिंग के नए मौके भी खुल सकते हैं।