भारत-पाकिस्तान में तनाव के बीच कितना गिर गया सोना? अभी खरीदना सही या करना चाहिए इंतजार, सब कुछ जानिए

सोने की कीमतों में कमी आने की कई वजह हैं। त्योहार और शादी सीजन नहीं है तो सोने की कीमत कम है। उसके अलावा अमेरिका का टैरिफ वॉर हालिया दिनों में शांत पड़ा है। इधर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के हालात रहे। कुल मिलाकर इसका असर सोने की कीमतों पर दिखाई दिया।

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सोने की कीमतों में गिरावट आई. | Image: AI

Gold Rate: भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच जिसकी चर्चा लगभग गायब रही वो सोना है, जो ऑपरेशन सिंदूर से पहले आए दिन नए रिकॉर्ड बना रहा था। हालांकि जब भारत और पाकिस्तान में तनाव जोरों पर चला, उस बीच सोने के दाम नीचे गिर गए। ऑपरेशन सिंदूर वाले दिन ही सोने की कीमतें लगभग एक लाख रुपये प्रति तोला थीं, जो घटकर 24 कैरेट 10 ग्राम की गोल्ड की कीमत 95,140 रुपये पर है।

सोने की कीमतों में कमी आने की कई वजह हैं। त्योहार और शादी सीजन नहीं है तो सोने की कीमत कम है। उसके अलावा अमेरिका का टैरिफ वॉर हालिया दिनों में शांत पड़ा है। इधर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के हालात रहे। कुल मिलाकर इसका असर सोने की कीमतों पर दिखाई दिया, जिसमें लगभग दो हफ्ते के भीतर 5 हजार रुपये के करीब की गिरावट दर्ज हो चुकी है।

2025 में कैसे सोना चमका?

एक जनवरी 2025 को सोने की कीमतें लगभग 76 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम थीं। जनवरी बीतते बीतते 30 तारीख तक सोने के दाम 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गए। फरवरी के आखिरी में कीमतें 85 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर चली गईं। मार्च का महीना थोड़ी बहुत उछालकर के साथ बीता, लेकिन अप्रैल में सोने की कीमतों ने 90 हजार रुपये का आंकड़ा पार कर दिया। अप्रैल के आखिरी और शुरुआती मई में सोने ने अपना हाईस्कोर पूरा किया और भारत में कीमतें एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच गईं। फिलहाल की बात करें तो शुक्रवार को सोने की कीमत 95 हजार रुपये के आसपास रहीं। दिल्ली में शुक्रवार को 24 कैरेट सोने का भाव 96,145 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है।

अभी सोना खरीदना सही या करना चाहिए इंतजार?

वैसे सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगा रहता है, लेकिन पिछले कुछ हफ्ते हाई रहे। अभी सोने की कीमतें धीरे-धीरे गिरी हैं तो खरीददारी करना शायद जल्दबाजी साबित हो सकता है। खासकर सिर्फ निवेश के लिए सोना खरीदना थोड़ी रिस्की हो सकता है। सोने की खरीददारी का इंतजार तब तक किया जाना चाहिए, जब तक कीमतें स्थिरता की स्थिति में ना आ जाएं। इसके लिए अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड वॉर को भी समझकर कदम उठाना फायदेमंद रहेगा।

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Published By :
Dalchand Kumar
पब्लिश्ड