अपडेटेड 30 January 2026 at 21:48 IST

Budget 2026: 1991 के बजट में क्या था? जिसे माना जाता है देश की अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट

Budget 2026: साल 2026 का बजट पेश होने में बस दो इन बचे हुए हैं। बजट पेशी पर हर साल करोड़ों लोगों का ध्यान रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों आज भी साल 1991 का बजट देश के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। आइए जानते हैं।

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1991 के बजट को ही क्यों माना जाता है टर्निंग पॉइंट | Image: Social media

Budget 2026: रविवार, 1 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट पेश होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार लोकसभा में बजट पेश करेंगी। आम लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है कि बजट में क्या-क्या मिलने वाला है।
स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर, 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था, लेकिन क्या आपको मालूम है आज भी साल 1991 का बजट देश के लिए आर्थिक दशा और दिशा बदलने वाला क्यों कहा जाता है। अगर आप भी नहीं जानते हैं, तो आइए जानते हैं।

1991 से पहले भारत की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

इतिहास के पन्नों को जब पलटा जाता है तो यह कहा जाता है कि साल 1991 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में थी। उस समय विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया था। अर्थव्यवस्था की हालत इतनी खराब थी कि सरकार को सोना गिरवी रखने तक की नौबत आ गई थी। महंगाई आसमान छू रही थी। एक तरफ उद्योग ठप पड़ रहे थे तो दूसरी तरफ बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही थी।

तत्कालीन सरकार का बड़ा फैसला

साल 1991 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में थी, तब ऐसे समय में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कई बड़े फैसले लिए। देश को आर्थिक संकट से निकालने के लिए सरकार ने एक ठोस रोडमैप तैयार किया, जो आगे चलकर भारत के लिए लाभदायक साबित हुआ।

विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोले गए

1991 के बजट में पहली बार भारत में विदेशी कंपनियों को निवेश करने की खुली छूट दी गई। बजट में सीमा शुल्क में भारी कटौती की गई। उस समय करीब 70 प्रतिशत तक सीमा शुल्क कम किया गया। जैसे ही सीमा शुल्क कम हुआ, वैसे ही भारत में आयात-निर्यात को बढ़ावा मिला और विदेशी निवेशकों की उम्मीद लौटने लगी।

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लाइसेंस राज का किया गया अंत

1991 के बजट में सबसे अहम कदमों में से एक कदम लाइसेंस राज का अंत करना था, जिसके चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली। पहले उद्योग शुरू करने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती थी, जिससे भ्रष्टाचार और बहुत देरी होती थी। 1991 के बजट में उद्योगों को आजादी दी गई कि वे खुद फैसले लें। इस फैसले से निजी क्षेत्र को नई ताकत मिली।

1991 के बाद भारत की तस्वीर बदली

साल 1991 में सरकार द्वारा पेश किए गए बजट के बाद भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे मजबूत होती गई। समय के साथ भारत में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा। आयात-निर्यात में तेजी देखी गई। भारत में लगातार विदेशी निवेश होने लगे। भारत वैश्विक मंच पर एक उभरती ताकत के रूप में सामने आया।

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गेम चेंजर माना जाता है 1991 का बजट

1991 में पेश किया गया बजट आज भी देश के लिए गेम चेंजर माना जाता है। डर के माहौल में सरकार द्वारा पेश बजट के चलते न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी, बल्कि उसके बाद से भारत वैश्विक मंच पर एक बड़ा बाजार के रूप में भी उभरा। 

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 30 January 2026 at 21:43 IST