पेरिस, लिमोज समेत कई शहरों में हिंसा... 1000 घायल, 2000 से ज्यादा गिरफ्तारियां और कर्फ्यू, आखिर फांस की सड़कों पर क्यों फूटा जनता का गुस्सा?

2026 में आंदोलन की शुरुआत पिछल महीने स्कूलों की बदहाली से हुई थी। खासकर पेरिस के कुछ इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर इमारतें और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट को लेकर छात्र और अभिभावक सड़कों पर उतरे।

फ्रांस में क्यों फूटा लोगों का गुस्सा | Image: AP

फ्रांस एक अमीर देश है लेकिन आज वहां के हालात से परेशान जनता सड़कों पर उतर आई है। आंदोलन में Gen-Z सबसे ज्यादा सक्रिय है। ऐसे में पेरिस से शुरू हुए आंदोलन ने देश के कई शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है। 17 अक्टूबर को फ्रांस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हिंसा और लूटपाट हुई। हालात बिगड़ने पर कई जगहों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा। देश के हालात को लेकर ट्रंप ने राष्ट्रपति मैक्रों पर निशाना साधा है।

फ्रांस में आंदोलन का लंबा इतिहास

फ्रांस में आंदोलन का इतिहास लंबा रहा है। इतिहास पर गौर करें तो सबसे पहले सन 1789 में राजा और अमीरों के विशेष अधिकारों के खिलाफ जनता ने विद्रोह किया था। इस क्रांति ने फ्रांस की राजनीतिक व्यवस्था बदल दी थी। तब से लेकर 2026 तक वहां कई बार जनता सड़कों पर उतर चुकी है।

2018-19 में भी महंगाई के खिलाफ जतना का आक्रोश फूटा था। तब लोगों ने ईंधन की बढ़ती कीमत और सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। साल 2023 में भी रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा था। तब सरकार ने रिटायरमेंट की न्यूनतम उम्र 62 से बढ़ाकर 64 साल कर दी थी। इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए थे।

स्कूलों की जर्जर हालत पर शुरू हुआ विरोध

2026 में आंदोलन की शुरुआत पिछल महीने स्कूलों की बदहाली से हुई थी। खासकर पेरिस के गरीबी वाले इलाकों में स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर इमारतें और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट को लेकर छात्र और अभिभावक सड़कों पर उतरे। यह आंदोलन धीरे-धीरे बढ़ता गया और देश भर की जनता इससे जुड़ती चली गई। आंदोलन के पीछे कई कारण हैं।

महंगाई और दैनिक जीवन यापन में कठिनाई

शिक्षा व्यवस्था की लड़ाई के बीच छात्रों के साथ जनता भी जुट गई। फ्रांस अमीर देश तो है लेकिन वहां अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई भी है। 2024 की फ्रांस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां करीब 15.4 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का करीब 48 फीसदी है। ऐसे में जब देश में ईंधन, भोजन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में काफी इजाफा हो गया है, तो जनता का गुस्सा फूटा और वे छात्रों और Gen-Z के साथ सड़कों पर उतर गई।

17 सितंबर को फ्रांस में क्या हुआ

शनिवार 17 सितंबर 2026 को बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। देश भर में करीब 5-8 लाख लोग सड़कों पर उतर गए। पेरिस के अलावा लिमोज, ल्योन, मार्सेय समेत कई शहरों में झड़पें हुईं। पुलिस को आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। लिमोज का ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग से नुकसान हुआ। ल्योन में टूरिस्ट ऑफिस जला दिया गया। हजारों दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ हुई। इस हिंसा में 2000 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए। सैकड़ों पुलिस कर्मियों समेत 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

राजनीतिक खींचतान से सरकार चलाना हुआ मुश्किल

साल 2024 में फ्रांस में संसदीय चुनाव हुआ था। तब वहां किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। संसद में वामपंथी दलों, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के समर्थकों और दक्षिणपंथी दलों के बीच सीटें बंट गई। इससे बजट और कई सरकारी नीतियों को संसद में मंजूरी दिलाना मुश्किल हो गया। साल 2024 में सांसदों ने प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर पारित करवा दिया। सितंबर 2025 में पीएम फ्रांस्वा बायरू की सरकार बजट और सरकारी योजना पर विवाद होने के बाद गिर गई। इसके बाद से वहां सियासी खींचतान जारी है।

फ्रांस में हिंसा पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

पेरिस में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन पॉलिसी को जिम्मेदार बताया है। सोमवार को रिपोर्टर्स के बाद करते हुए ट्रंप ने कहा कि फ्रांस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में विरोध प्रदर्शन और हिंसा एजुकेशन या घरेलू मुद्दों के बजाय इमिग्रेशन से जुड़े हैं। 

ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यूरोपियन देश बॉर्डर कंट्रोल को कठोर नहीं करते हैं और वैसे लोगों को अगर डिपोर्ट नहीं करते, जिन्हें उन्होंने क्रिमिनल बताया है तो उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने प्रेसिडेंट मैक्रों से कहा था अपने बॉर्डर बंद कर लो वरना तुम्हे परेशानी ही होगी। वे ऐसे लोगों को देश में आने देते हैं जो अपने देश से प्यार नहीं करते। उन्होंने कहा कि मैक्रों हमारे अच्छे दोस्त हैं लेकिन उन्होंने दुनिया भर के लोगों को फ्रांस में आने की इजाजत देकर गलती की है।

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 20 October 2026 at 18:01 IST