अपडेटेड 25 March 2026 at 07:38 IST

अमेरिका मिडिल ईस्ट में भेज रहा 82वीं एयरबोर्न के 1000 सैनिक, 18 घंटे के अंदर दुनिया के किसी भी हिस्से में पहुंच सकते हैं ये मरीन्स

अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कम से कम 1,000 सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रही है। 82वीं एयरबोर्न के ये जवान दुनिया के किसी भी हिस्से में 18 घंटे के अंदर पहुंच सकते हैं।

अमेरिका मिडिल ईस्ट में भेज रहा 82वीं एयरबोर्न के 1000 सैनिक | Image: AP

अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में कम से कम 1,000 सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रही है। ये सैनिक अमेरिकी सेना की एलीट इकाई 82वीं एयरबोर्न डिवीजन (82nd Airborne Division) के हैं, जो अमेरिकी थल सेना की Emergency Response Force मानी जाती है। यह सूचना मिलते ही बहुत कम समय में ऑपरेशन करने में सक्षम है।

विदेशी मीडिया के मुताबिक इन सैनिकों को जल्द ही तैनात करने का आदेश जारी किया जाएगा। अगले कुछ दिनों में तैनाती शुरू होने की संभावना है। इसमें 1st ब्रिगेड कॉम्बैट टीम का एक बटालियन शामिल होगा। साथ ही डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल ब्रैंडन टेग्टमेयर (Maj. Gen. Brandon Tegtmeier) और डिवीजन स्टाफ भी जाएंगे।

यह डिवीजन नॉर्थ कैरोलाइना के फोर्ट ब्रैग (Fort Bragg) में स्थित है। यह तैनाती अमेरिका की मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य उपस्थिति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह ही अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि कई नौसेना जहाजों पर सवार हजारों मरीन्स (Marines) भी इस क्षेत्र की ओर रवाना हो रहे हैं।

क्यों खतरनाक हैं मरीन्स?

मरीन यूनिट्स को दूतावासों की सुरक्षा, नागरिकों की निकासी और आपदा राहत जैसे मिशनों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। वहीं, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को दुश्मन के इलाकों और विवादित क्षेत्रों में पैराशूट से उतरकर महत्वपूर्ण इलाकों और एयरफील्ड्स को सुरक्षित करने में महारत हासिल है। यह इकाई बहुत कम समय में तेजी से तैनात की जा सकती है।

यह तैनाती तब हो रही है जब अमेरिका पहले ही क्षेत्र में लगभग 50,000 सैनिकों की मौजूदगी रखता है। हाल ही में हजारों मरीन सैनिकों को कई नौसेना जहाजों पर क्षेत्र की ओर रवाना किया गया है। 

चीते की रफ्तार से करते हैं काम

यह तैनाती ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और संघर्ष के बीच हुई है, जहां अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। 82वीं एयरबोर्न की यह रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स दुनिया के किसी भी हिस्से में 18 घंटे के अंदर पहुंच सकती है। फिलहाल इस तैनाती की पेंटागन या व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।

ईरान युद्ध और कूटनीतिक प्रयास

यह कदम ईरान युद्ध के बीच उठाया जा रहा है, जिसमें कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ईरान के साथ बातचीत शुरू हो गई है। पाकिस्तान ने इन वार्ताओं की मेजबानी की पेशकश की है, लेकिन ईरान ने किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि “हम अभी बातचीत कर रहे हैं। हमारे कई लोग यह काम कर रहे हैं। और दूसरी तरफ, मैं आपको बता सकता हूं कि वे डील करना चाहते हैं।”

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 25 March 2026 at 07:31 IST