Iran पर 9 दिनों तक ताबड़तोड़ हमले के बाद अमेरिका ने दिखाई उम्मीद की किरण, मार्को रुबियो बोले- ईरान के अलग-अलग चैनलों से बातचीत के मिल रहे संकेत

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि गुप्त चैनलों से ईरान के बातचीत की मेज पर आने के संकेत मिल रहे हैं। ईरानी नेतृत्व में इसे लेकर मतभेद हैं।

ईरान संग बातचीत पर मार्को रुबियो का बयान | Image: ANI

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध जारी है। दोनों ही पक्ष अपने कदम खींचने को तैयार नहीं है। एक ओर अमेरिका लगातार ईरान पर जोरदार हमले कर रहा है। वहीं, ईरान का भी पलटवार जारी है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका का दावा है कि ईरान फिर से बातचीत की मेज पर लौटना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कहा है कि अमेरिका को विभिन्न गुप्त चैनलों के जरिए तेहरान की ओर से बातचीत की पेशकश के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के भीतर वार्ता को लेकर गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं।

बातचीत के लिए तैयार ईरान? 

CNN को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया, "हमें कई अलग-अलग चैनलों के माध्यम से यह संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत की मेज पर आना चाहता है। लेकिन, वहां के शासन के भीतर इस मुद्दे पर एक बड़ी और बढ़ती हुई फूट साफ देखी जा सकती है।"

आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए फिलीपींस रवाना होने से ठीक पहले संवाददाताओं से बात करते हुए रुबियो ने ईरान पर वैश्विक व्यापारिक जलमार्गों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को रणनीतिक ढाल बनाकर पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है।

होर्मुज को हथियार बना रहा ईरान- रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान, "यह बात साफ है कि ईरान के कुछ लोग इस जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण जमाकर दुनिया के खिलाफ इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। अमेरिका समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए जो जरूरी है वह करता रहेगा, लेकिन अब अन्य देशों को भी आगे आना होगा- चाहे वह सैन्य उपकरण प्रदान करके हो या वित्तीय योगदान देकर।"

मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका हमेशा कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार रहा है और आगे भी रहेगा, लेकिन कोई भी समझौता ठोस और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे (ईरान) किसी समझौता ज्ञापन (MoU) के अस्तित्व की उम्मीद तब तक नहीं कर सकते जब तक वे उसकी शर्तों का लगातार उल्लंघन कर रहे हों।

रुबियो और अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों एक साथ चल सकते हैं।

अमेरिका-ईरान में भीषण जंग जारी

इससे पहले रविवार (19 जुलाई) को अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। यह लगातार नौवीं ऐसी रात है जब अमेरिकी फाइटर जेट्स और क्रूज मिसाइलों ने ईरानी ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस दौरान उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया। दक्षिणी प्रांत होरमोजगान और बुशेहर में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। चाबहार में भी कई धमाके हुए।

अमेरिका के हमलों का ईरान ने भी जवाब दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरी इराक में ईरान ने एक ड्रोन से बम गिराया था, जो फटा नहीं था। जैसे ही अमेरिकी सैनिक उसे डिफ्यूज करने गए, वहां धमाका हो गया और उनकी मौत हो गई। 28 फरवरी से शुरू हुई इस युद्ध में अब तक 17 अमेरिकी जवानों की जान जा चुकी है।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 20 July 2026 at 14:48 IST