टैरिफ, वीजा की पाबंदियों से राहत... अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को लगा झटका, तो नतीजे भारत के लिए क्यों है अहम? एक्सपर्ट ने समझाया
अमेरिकी चुनाव के नतीजों में आए उलटफेर का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है। कांग्रेस और अमेरिकी सरकार के फैसले भारतीय निर्यात, अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और दोनों देशों के रक्षा सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों से मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। विशेषज्ञ इसे राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ सीधा जनादेश मान रहे हैं। इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कई राज्यों में नुकसान उठाना पड़ा। टैक्सस जैसे राज्य भी छिन गए, जहां चार दशक से डेमोक्रेट्स को बढ़त नहीं मिली थी। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अमेरिकी चुनाव के इस उलटफेर का भारत पर और वहां रहे भारतीय पर क्या असर पड़ेगा आईए एक्सपर्ट से समझते है।
अमेरिकी चुनाव के इस उलटफेर का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है। कांग्रेस और अमेरिकी सरकार के फैसले भारतीय निर्यात, अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और दोनों देशों के रक्षा सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका भारतीय सामानों का बड़ा बाजार है। इसलिए टैरिफ नीति में कोई भी बदलाव निर्यातकों को सीधे प्रभावित करेगा। ट्रंप प्रशासन ने पहले कई बार भारत पर भारी से भारी टैरिफ लगाकर व्यापार को प्रभावित किया था। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है।
H-1B वीजा धारकों पर पड़ेगा असर?
अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के H-1B वीजा धारकों पर भी असर पड़ सकता है। कांग्रेस के नियंत्रण में बदलाव से आव्रजन कानूनों और उनकी निगरानी के तरीकों में बदलाव आ सकता है। रिपब्लिकन पार्टी समर्थित कुछ प्रस्तावों पर रोक लग सकती है। इनमें पिछले सितंबर में घोषित नए H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 डॉलर की फीस लगाने का फैसला भी शामिल है।
एक्सपर्ट ने बताया नतीजों के बाद क्या होगा?
पूर्व वरिष्ठ राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने ANI से बातचीत में कहा कि डेमोक्रेट्स की बड़ी बढ़त और कांग्रेस पर नियंत्रण से कार्यकारी शक्तियों पर जरूरी अंकुश लगेगा। इससे व्यापारिक संबंधों में स्थिरता आएगी और भारत को रणनीतिक तथा आर्थिक मोर्चों पर नए अवसर मिलेंगे। विद्या भूषण ने ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को अव्यावहारिक और मनमाना बताया। उन्होंने कहा, “हर तरह के टैरिफ, बिल्कुल बेतुके टैरिफ लगाए गए थे, और वे बिना किसी रोक-टोक के ऐसा कर रहे थे; इसे रुकना ही चाहिए। हो सकता है कि कुछ फैसले वापस ले लिए जाएं, लेकिन कम से कम अब कुछ समझदारी तो वापस आएगी।”
FTA में हो सकती है देरी
H-1B वीजा और भारतीय छात्रों से जुड़ी अनिश्चितताओं पर सोनी ने जोर दिया कि अमेरिकी तकनीक को भारतीय प्रतिभाओं से सीधा लाभ मिलता है। कांग्रेस की निगरानी बढ़ने से अचानक लगाई जाने वाली वीजा पाबंदियों पर लगाम लगने की उम्मीद है, जिनका असर करीब 3 लाख कामगारों और छात्रों पर पड़ता है। वहीं, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर सोनी ने कहा कि डेमोक्रेट्स द्वारा श्रम और पर्यावरण मानकों की समीक्षा से इसमें देरी हो सकती है, लेकिन यह फायदेमंद है। उन्होंने कहा, “एक खराब समझौता करने के बजाय, बेहतर है कि समझौते में देरी हो ताकि उस पर और अधिक चर्चा की जा सके।”
विद्या भूषण सोनी ने भरोसा जताया कि भारत के मुख्य रणनीतिक हितों, विशेष रूप से 'क्वाड' समूह पर वाशिंगटन में फिर से ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकतरफा फैसलों के बजाय आपसी परामर्श और व्यवस्थित कूटनीति की ओर लौटने से वैश्विक समुदाय और यूरोप तथा NATO में मौजूद पारंपरिक सहयोगियों को भी फायदा होगा। कांग्रेस में आया यह राजनीतिक बदलाव घरेलू आर्थिक दबावों- जैसे महंगाई, छात्रों पर कर्ज और रोजगार की सुरक्षा- को लेकर जनता की नाराजगी का नतीजा है।
ट्रंप के फैसलों पर अब कड़ी निगरानी
इसके साथ ही, प्रशासन की विदेश नीति और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव भी इसके कारण रहे हैं। कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से कार्यकारी फैसलों पर अब कड़ी निगरानी रहेगी। यह इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच अब बहुपक्षीय बातचीत और व्यवस्थित वार्ताओं का दौर शुरू हो सकता है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 5 November 2026 at 23:56 IST