अपडेटेड 21 January 2026 at 21:58 IST
जापान में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट फिर से शुरू, फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद 2011 से था बंद
जापान में फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद दुनिया के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र का संचालन बुधवार को फिर से शुरू हो गया है। जापान बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
World's Largest Nuclear Power Plant : जापान में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट (काशीवाजाकी-कारिवा) बुधवार को फिर से शुरू हो गया। उत्तर-मध्य जापान में 2011 के फुकुशिमा न्यूक्लियर हादसे के बाद से यह बंद था। जापान बढ़ती बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए एटॉमिक पावर का इस्तेमाल बढ़ा रहा है, तो इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की जरूरत एक बार फिर महसूस की गई। इसके बाद अब इसे फिर से चालू कर दिया गया है।
न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर लोगों में चिंता
काशीवाजाकी-कारिवा न्यूक्लियर पावर प्लांट के नंबर-6 रिएक्टर में एनर्जी प्रोडक्शन की शुरुआती प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इसका संचालन टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स (TEPCO) द्वारा किया जा रहा है। यह वहीं कंपनी है जो फुकुशिमा दाइची न्यूक्लियर पावर प्लांट के ऑपरेशन के लिए भी जिम्मेदार है। फुकुशिमा में टीईपीसीओ (TEPCO) की पिछली सुरक्षा समस्याओं के कारण, काशीवाजाकी-कारिवा संयंत्र के संचालन को लेकर लोगों में चिंताएं है, खासकर इसलिए क्योंकि यह प्लांट एक भूकंप संभावित क्षेत्र में स्थित है।
हादसा प्रभावित क्षेत्र अभी भी रहने लायक नहीं
काशीवाजाकी-कारिवा न्यूक्लियर पावर प्लांट के सभी सात रिएक्टर मार्च 2011 में फुकुशिमा दाइची प्लांट में हुए हादसे के बाद से बंद पड़े थे। बता दें, इस हादसे में रिएक्टर मेल्टडाउन हो गए थे, जिससे आसपास की जमीन रेडियोएक्टिव कचरे से आसपास का क्षेत्र इतनी बुरी तरह दूषित हो गया था कि अब भी वहां रहने लायक नहीं है।
दाइची प्लांट में सफाई करा रही TEPCO
हालांकि TEPCO अब अपनी छवि को सुधारने की कोशिश कर रही है। वह फुकुशिमा दाइची प्लांट में सफाई कार्य भी कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत 22 ट्रिलियन येन (लगभग 139 अरब डॉलर) है। साल 2011 के बाद से जापान में कुल 14 अन्य परमाणु रिएक्टरों का फिर से संचालन शुरू किया गया है, लेकिन यह पहली बार है जब टीईपीसीओ संचालित रिएक्टर फिर से उत्पादन करने लगा है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 21 January 2026 at 21:58 IST