अपडेटेड 18 March 2026 at 09:06 IST

US-Iran War: अब होर्मुज खुलवाने के मिशन पर अकेला जुटा अमेरिका, ईरान की मिसाइलों पर 5000 पाउंड बंकर बस्टर से हमला, दहल उठा तेहरान

US attack Iran: अमेरिका ने होर्मुज को खुलवाने के लिए अब ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया है और वहां 5,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है।

अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान की मिसाइलों पर हमला किया | Image: X

US-Iran war news: मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध ने और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिकी सेना अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कराने के मिशन में जुट गई है। इसी सिलसिले में सेना ने होर्मुज के पास ईरान की मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड वजनी ‘डीप पेनिट्रेटर’ बंकर बस्टर बम गिराए।

ईरानी मिसाइल केंद्र पर गिराए बंकर बस्टर बम

यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक  पोस्ट में बताया कि ये हमले ईरान की एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निशाना बनाकर किए गए, जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन चुकी थीं। ईरान ने युद्ध के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।

क्या है बंकर बस्टर बम?

बंकर बस्टर बम अमेरिकी वायुसेना के सबसे शक्तिशाली हथियारों में शामिल हैं। यह जमीन के अंदर छिपे मजबूत ठिकानों को तबाह कर सकते हैं। 2022 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है। अमेरिका ने 5000 पाउंड यानी 2200 किलो वाले बम से हमला किया है। हालांकि उसके पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम भी हैं।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। क्षेत्र में कोई भी सैन्य गतिविधि या रुकावट सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर गहरा प्रभाव डालती है। भारत की भी ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इस रास्ते से होकर गुजरता है।

होर्मुज पर अलग-थलग पड़े ट्रंप

यह हमला ऐसे वक्त में किया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार होर्मुज की सुरक्षा के लिए कई देशों से गुहार लगा रहे थे। ज्यादातर NATO सहयोगियों ने ईरान में देश के सैन्य अभियान में शामिल नहीं होने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने इस कदम को "बहुत बड़ी बेवकूफी" बताया। उन्होंने कहा, "हर कोई हमसे सहमत है, लेकिन वे मदद नहीं करना चाहते।"

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अन्य देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की निगरानी में मदद करने की अपील की। कई देशों ने साफ किया कि होर्मुज को खोलने में मदद के लिए जहाज भेजने की उनकी कोई तत्काल योजना नहीं है। इस तरह उन्होंने सैन्य सहायता के लिए ट्रंप की अपील को प्रभावी रूप से ठुकरा दिया।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 18 March 2026 at 09:06 IST