अपडेटेड 13 March 2026 at 23:06 IST
Iran Israel War: ईरान-इजरायल जंग में रूस को होने वाला है जबरदस्त फायदा... समझिए क्या है 'तेल के खेल' का पूरा माजरा
वैश्विक तेल संकट के कारण अमेरिका को रूसी तेल पर कुछ ढील देनी पड़ी, और रूस ने इसे अपनी अहमियत का सबूत बताते हुए कहा कि दुनिया को उनके तेल के बिना काम नहीं चल सकता। यह फैसला अभी सिर्फ 30 दिनों का है और इसका मकसद तेल कीमतों को नीचे लाना है, लेकिन इससे रूस को थोड़ा फायदा जरूर हो रहा है।
Iran Israel War: ईरान के साथ बढ़ते युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसका रूस ने स्वागत किया है। अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध और इससे खड़े हुए ऊर्जा संकट का हल निकाल लिया है। जिसमें समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति दी गई है।
जिसमें समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए देशों को 30 दिनों की विशेष अनुमति (लाइसेंस) दी गई है। यह फैसला वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने और तेजी से बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं—यह लगभग चार साल का उच्चतम स्तर है।
दरअसल, दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ गई हैं। क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जो पिछले कई सालों में सबसे अधिक है। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल का बढ़ता संघर्ष है। इस युद्ध से होर्मुज ऑफ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण जल मार्ग बंद हैं, जहां से दुनिया का 20% से अधिक तेल और गैस गुजरता है।
तेल कीमतों को काबू करने के लिए फैसला
अमेरिका के इस फैसले के बाद अलग-अलग देश समुद्र में पहले से लदा हुआ रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीद सकें। यह तेल पहले से जहाजों पर था और प्रतिबंधों की वजह से अटका हुआ था। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह फैसला ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लिया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इससे रूस की सरकार को ज्यादा फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह सिर्फ अस्थायी और सीमित है।
रूस ने किया फैसले का स्वागत
रूस ने इस फैसले का स्वागत किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि "बाजार को स्थिर करना रूसी तेल की महत्वपूर्ण मात्रा के बिना संभव नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है और इस मामले में रूस के हित भी उसी से जुड़े हैं।
पेस्कोव ने यह भी कहा कि ईरान संकट की वजह से अमेरिका की यूक्रेन में शांति वार्ता में दिलचस्पी कम नहीं होगी। रूस को इसकी कोई चिंता नहीं है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 13 March 2026 at 23:06 IST