अपडेटेड 19 March 2026 at 07:30 IST
वैश्विक ऊर्जा संकट की शुरुआत? ईरान में दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस फील्ड पर हमला, भारत तक महंगाई का खतरा, जानें कितना होगा असर
8 मार्च 2026 को ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला हुआ। दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार में उत्पादन ठप हो गया और भीषण आग लग गई। ईरान ने सऊदी, यूएई, कतर के प्रमुख तेल-गैस ठिकानों पर जवाबी हमले की चेतावनी दी है। ब्रेंट क्रूड 109$ पार, भारत में ईंधन महंगा होने का खतरा बढ़ा। वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
18 मार्च 2026 को इजरायल-ईरान युद्ध एक नए स्तर पर पहुंच गया। ईरान में साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड पर बड़े पैमाने पर हमला हुआ। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जो ईरान और कतर के बीच फारस की खाड़ी में स्थित है। ये पहली बार है जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान में प्राकृतिक गैस के ठिकानों को निशाना बनाया है।
इस हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी देशों के तेल और गैस फील्ड्स पर हमला करने की धमकी दी है। ईरान ने कहा कि आने वाले कुछ घंटों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के पांच ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की खुली धमकी दे दी है।
ईरानी सरकारी मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में असालुयेह (Asaluyeh) में स्थित पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, प्रोसेसिंग यूनिट्स और कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। हमले के बाद कई जगहों पर भीषण आग लग गई, जिससे गैस उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। आपातकालीन टीमें आग पर काबू पाने में जुटी रहीं, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में कई विस्फोटों और भारी नुकसान की बात कही गई।
अमेरिका-इजरायल को ठहराया जिम्मेदार
ईरान ने इस हमले के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। यह हमला अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन पहली बार ऊर्जा क्षेत्र के इतने बड़े ठिकाने को निशाना बनाया गया। इससे पहले हमले ज्यादातर सैन्य या परमाणु-संबंधित सुविधाओं पर केंद्रित थे।
ईरान की इन देशों को धमकी
हमले के तुरंत बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के कई प्रमुख तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इनमें SAMREF रिफाइनरी, जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, अल होसन गैस फील्ड, रास लाफान रिफाइनरी और मेसईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। ईरान ने इन देशों को चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई होगी।
तेल की कीमतों में लगी 'आग'
इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गईं, जो कुछ ही घंटों में 5% से ज्यादा की उछाल थी। यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी 6% तक बढ़ गईं। साउथ पार्स फील्ड ईरान की घरेलू गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है और कतर के जरिए वैश्विक एलएनजी सप्लाई में भी अहम भूमिका निभाता है। उत्पादन में रुकावट से पूरी खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से एलएनजी के रूप में आयात करता है, और गल्फ देशों से LPG का करीब 80-85% हिस्सा आता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा और सप्लाई चेन बाधित हुई, तो भारत में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ेगी और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। यह हमला क्षेत्रीय संघर्ष को आर्थिक युद्ध में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
वर्तमान में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया से तय होगा कि ऊर्जा संकट कितना गहराता है। पूरी दुनिया की नजरें अब फारस की खाड़ी पर टिकी हैं, जहां ऊर्जा की आपूर्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 19 March 2026 at 07:18 IST