वैज्ञानिकों ने अर्जेंटीना में खोज निकाली नई डायनासोर की प्रजाति, Joaquinraptor casali रखा नाम, मुंह में मिली मगरमच्छ की हड्डी
शोधकर्ताओं के अनुसार यह डायनासोर लगभग 66 से 70 मिलियन साल पहले जिंदा था, जो डायनासोरों के विलुप्त होने के समय के करीब है। मौत के समय इसकी उम्र कम से कम 19 साल रही होगी।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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वैज्ञानिकों ने अर्जेंटीना के पैटागोनिया क्षेत्र में एक नई डायनासोर प्रजाति की खोज की है, जिसके मुंह में एक मगरमच्छ की हड्डी मिली है। इस खोज से मेगाराप्टोरन (Megaraptoran) नामक रहस्यमयी डायनासोर समूह के बारे में नई जानकारी मिलेगी। शक्तिशाली पंजों वाला यह डायनासोर एक प्राचीन मगरमच्छ की हड्डी खा रहा था।
वैज्ञानिकों को जिस डायनासोर के अवशेष मिले हैं, वो करीब 23 फीट लंबा था और मेगारैप्टोरन नामक डायनासोर के एक रहस्यमय समूह का था। ये डायनासोर आज के दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों में घूमते फिरते थे और लाखों साल में अलग-अलग प्रजातियों में बंट गए। इस नए डायनासोर का नाम जोआकिनरैप्टर कैसाली (Joaquinraptor casali) रखा गया है।
मेगाराप्टोरन की खोज
खोज दल का हिस्सा रहे पैटागोनियन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी एंड पेलियोन्टोलॉजी के लुसियो इबिरिकु ने कहा कि मेगाराप्टोरन अपनी फैली हुई खोपड़ियों, विशाल और बहुत शक्तिशाली पंजों के लिए जाने जाते थे। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये जीव कैसे शिकार करते थे और विकासवादी समयरेखा में वे कहां आते हैं। क्योंकि अब तक मिले जीवाश्म पूरे नहीं थे।
एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें पैटागोनिया के लागो कोल्हुए हुआपी चट्टानी संरचना से एक खोपड़ी का एक हिस्सा, हाथ, पैर और पूंछ की हड्डियां मिलीं। उन्होंने हड्डियों में कुछ अनोखी विशेषताएं देखीं जिनसे उन्हें लगा कि यह एक नई प्रजाति हो सकती है। इन डायनासोरों की विशेषता उनके लंबे खोपड़ी और शक्तिशाली पंजे थे, जो शिकार करने में उपयोगी होते थे। यह जीवाश्म मेगाराप्टोरन समूह के सबसे पूर्ण कंकालों में से एक है, जो इस समूह की समझ में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
बेटे के नाम पर रखा नाम
यह डायनासोर लगभग 66 से 70 मिलियन साल पहले जिंदा था, जो डायनासोरों के विलुप्त होने के समय के करीब है। मौत के समय इसकी उम्र कम से कम 19 साल रही होगी। हालांकि, मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। इसके मुंह के पास मिली मगरमच्छ की हड्डी से इसके शिकार के बारे में संकेत मिलते हैं। खोजकर्ता लुसियो इबिरिकु ने इस डायनासोर का नाम अपने बेटे जोआकिन के सम्मान में रखा। उन्होंने कहा कि बच्चे डायनासोरों को पसंद करते हैं, इसलिए उनका बेटा भी इसे पसंद करेगा। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 28 September 2025 at 22:29 IST