PM मोदी ने मेलोनी को दिया Melody तो फिर सुर्खियों में आ गई टॉफी, जानिए कैसे बनती है और क्यों पसंद की जाती है ये चॉकलेट
PM Modi Gifts Melody to Giorgia Meloni: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को "Melody" टॉफी गिफ्ट की जिसके बाद ये टॉफी फिर सुर्खियों में आ गई है।
PM Modi Gifts Melody to Giorgia Meloni: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को "Melody" टॉफी गिफ्ट करते नजर आ रहे हैं। मेलोनी ने भी ये अनोखा तोहफा देने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद किया है।
इसका वीडियो खुद जॉर्जिया मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ कोलैबोरेशन में सोशल मीडिया पर साझा कर दिया है जिसे देख लोग हैरान रह गए हैं। ये मूमेंट PM मोदी की इटली यात्रा के आखिरी पड़ाव के दौरान हुआ और उनकी ये यात्रा उनकी चल रही पांच-देशों की कूटनीतिक यात्रा का हिस्सा थी।
PM मोदी ने मेलोनी को दी मेलोडी चॉकलेट
मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ ये वीडियो शेयर किया है जिसमें वो कह रही हैं- ‘पीएम मोदी मेरे लिए ये गिफ्ट लेकर आए हैं, एक बहुत-बहुत अच्छी टॉफी’। फिर दोनों नेताओं ने मुस्कुराते हुए एक साथ "Melody" कहा और जोर से हंस पड़े।
इस वीडियो को शेयर करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कैप्शन में लिखा- ‘इस गिफ्ट के लिए धन्यवाद’। जबसे उनका ये वीडियो सामने आया है, "Melody Toffee" एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
जानकारी के मुताबिक, मेलोडी को चॉकलेटी बनाने के लिए Soy-Lecithin नामक इंग्रेडिएंट का इस्तेमाल किया जाता है जो टॉफी की शेल्फ-लाइफ को बढ़ाता है। साथ ही शुगर क्रिस्टलाइजेशन और चॉकलेट की तरलता को भी कंट्रोल करता है। इसमें चीनी, तरल ग्लूकोज, कोको पाउडर, दूध के ठोस पदार्थ, माल्ट एक्सट्रेक्ट, साधारण नमक, सॉर्बिटोल सिरप, सोया लेसिथिन, कारमेल, आर्टिफिशियल फ्लेवर, चॉकलेट और वेनिला डाला जाता है।
मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?
मेलोडी की टैगलाइन आज भी सबकी जुबां पर हैं जो है- 'ये मेलोडी आखिर इतनी चॉकलेटी क्यों है?' इस टॉफी के अंदर एक सख्त कारमेल की लेयर होती है जबकि उसके अंदर बीचों-बीच पिघला हुआ चॉकलेटी-मिल्क होता है। इसके इतनी चॉकलेटी होने की यही वजह बताई जाती है। आप मेलोडी खाओगे तो आपको एक साथ दोनों स्वाद भर-भरकर मिलेंगे। तभी तो सवाल करने वाले को यही जवाब मिलता है- "मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ"।
इस टॉफी को Parle कंपनी ने 1983 में लॉन्च किया था। मेलोडी टॉफी के जरिए पारले ने मार्केट में एक एक्सपेरिमेंट किया। उस समय की ज्यादातर टॉफी या कैंडी या तो सख्त होती थीं या बहुत ज्यादा नरम। ऐसे में कंपनी कम पैसों में एक टॉफी के अंदर चॉकलेट जैसा अनुभव देना चाहती थी। जब आप इस टॉफी को खाते हैं तो बाहर एक सख्त कैरेमल का टेस्ट आता है, फिर इसे चबाते ही मुंह में चॉकलेटी क्रीम भर जाती है।
कैसे बना ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है’ कैंपेन?
सामने आई जानकारी की माने तो, पारले कंपनी बिना किसी का नाम लिए अपनी टॉफी को बाकी टॉफी के मुकाबले ज्यादा चॉकलेटी दिखाना चाहती थी। ऐसे में उन्होंने कैंपेन बनाने का नाम एवरेस्ट कंपनी को दिया। तब हरेश मूरजानी के दिमाग में एक आईडिया आया। उन्होंने ऐड में ऐसे लोगों को दिखाने का सोचा जिन्हें बच्चे आईडल मानते हैं। इसी आईडिया पर कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने लाइनें लिखना शुरू कर दिया।
तभी उन्होंने कुछ ऐसी आईकॉनिक लाइनें दीं जो आगे जाकर मेलोडी की पहचान बन गईं। इनमें से एक थी- ‘मेलोडी के अंदर इतनी चॉकलेट कैसे भरी, बताओ’, जिसका जवाब था- ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’। बाद में कंपनी ने एक जिंगल भी निकाला- ‘मेलोडी है चॉकलेटी, मेलोडी है चॉकलेटी’। बाद में टीवी एड बना जिसमें पूछा जाता- ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है’। जिसका जवाब मिलता- ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’। यही करते-करते लोगों में उत्सुकता पैदा हो गई कि आखिर इस टॉफी में इतना चॉकलेटी टेस्ट कैसे आता है और यही इसकी कामयाबी का एक बड़ी कारण बनी।
अब पारले कंपनी ने भी पीएम मोदी और मेलोनी का ये वीडियो रीशेयर करते हुए कैप्शन में लिखा- ‘1983 से रिश्तों को मधुर बनाते आ रहे हैं’।
Published By : Sakshi Bansal
पब्लिश्ड 20 May 2026 at 16:41 IST