Nepal Flood: चीन सीमा पर 5000 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की चोटियों में क्या हुआ था? जिससे नेपाल में आई भीषण बाढ़ त्रासदी
सैटेलाइट तस्वीरों की स्टडी से पता चलता है चीन की सीमा पर हिमालय की चोटियों में ग्लेशियर में ऐसी गतिविधि हुई, जिससे ये हादसा हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों में गैंगटांग लिरुंग की उत्तरी दीवार पर 5000 मीटर की ऊंचाई पर करीब 1.5 किलोमीटर चौड़ी दरार देखी गई। ग्लेशियर टूटा फिर बेडरॉक फेल्योर के कारण चट्टान के साथ इस दरार के जरिए बर्फ और मलबा 1000 मीटर नीचे गिर गया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 4 min read
नेपाल में बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। पड़ोसी देश नेपाल अपने इतिहास के सबसे बड़ी त्रासदी को झेल रहा है। बुधवार 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल में सैकड़ों लोगों को काल के गाल में समा ले गया तो हजारों लोगों के घर मकान उजाड़ गए। बाढ़ ने उन लोगों को जीवन के उस दहलीज पर खड़ा कर दिया, जहां से उन्हें वापस खड़ा होने में महीनों सालों लग जाएंगे। फिलहाल नेपाल की सेना अपनी पूरी ताकत झोंक कर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है।
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक ये जल प्रलय कैसे आया। एक्सपर्ट्स इसकी जांच-पड़ताल में जुटे हैं। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग एक बड़ा कारण है। सैटेलाइट तस्वीरों की स्टडी कर एक्सपर्ट्स ने कुछ निष्कर्ष निकाले हैं। हम उसके बारे में समझते हैं।
नेपाल में बाढ़ का नया अलर्ट जारी
पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। वहां एक ताजा अलर्ट जारी किया गया है। उसके मुताबिक चीनी ड्रोन ने देखा कि 27 अगस्त को एक नई झील बन गई है। ये काफी बड़ी है। अगर ये टूटती है तो नेपाल में दोबारा बाढ़ आ सकती है। अर्लट के बाद भोटेकोशी-त्रिशूली इलाके में फिर से खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज रहा है। इसलिए राहत-बचाव कार्य भी थोड़ा धीमा हो गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और मौत का आंकड़ा
नेपाल की सेना राहत और बचाव कार्य में जी जान से जुटी है। कड़ी मशक्कत के बाद सेना ने अब तक 3740 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, जबकि बाढ़ की चपेट में आकर जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 538 से ज्यादा हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई और हालात की समीक्षा की।
5000 मीटर की ऊंचाई पर क्या हुआ था?
नेपाल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों की स्टडी से पता चलता है चीन की सीमा पर हिमालय की चोटियों में ग्लेशियर में ऐसी गतिविधि हुई, जिससे ये हादसा हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों में गैंगटांग लिरुंग की उत्तरी दीवार पर 5000 मीटर की ऊंचाई पर करीब 1.5 किलोमीटर चौड़ी दरार देखी गई। ग्लेशियर टूटा फिर बेडरॉक फेल्योर के कारण चट्टान के साथ इस दरार के जरिए बर्फ 1000 मीटर नीचे गिर गई। फिर घर्षण से बर्फ पिघली। एक्सपर्ट्स इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग से इनकार नहीं कर रहे हैं।
अचानक इनका 1000 मीटर नीचे गिरने से करीब 5.2 मैग्नीट्यूड के भूकंप जैसा कंपन पैदा हो गया। ये सारा मलबा करीब 2 करोड़ घन मीटर का था, जो भूगोलीय घटना के इतिहास में रिकॉर्ड है। ये मलबा ल्हेंदे में गिरा और 15 किलोमीटर आगे रसुवागढ़ी चेकपॉइंट तक पहुंचा। मलबे के प्रवाह और आवेग को फ्रेंडशिप ब्रिज के पास देखा जा सकता है। ये ब्रिज बाढ़ की लहर में ताश की पत्तों की तरह बिखर गया। ऊपर के सैटेलाइट इमेज में बाढ़ से पहले और बाढ़ के बाद उस स्थान को देखा जा सकता है। इसे आवेग के कारण किसी को कुछ समझने और सावधान होने का मौका तक नहीं मिला। यही कारण है कि इस फ्लैश फ्लड ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई।
नेपाल बाढ़ त्रासदी का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है,जो काफी भयावह है। जिसे देखकर हर किसा का रूह कांप रहा है। ये कल्पना से परे है कि जो लोग उस हालात से गुजरे होंगे उनके ऊपर क्या गुजर रहा होगा।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 28 August 2026 at 19:58 IST