नेपाल में रूह कंपाने वाले हालात, मलबे में जगह-जगह मिल रहा शव... जलाने के बजाय कोरोना काल की तरह लाशों को क्यों दफना रही सरकार?
नेपाली सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है इतनी बड़ी संख्या में बरामद शवों का कैसे पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार किया जाए। मोरचरी लाशों से भर गई है। मुर्दाघर में जगह नहीं बची है। बता दें कि नेपाल में करीब 350 शवों को ही रखने की सुविधा है। ऐसे में वहां सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू हो गया है। सड़कों पर, जंगलों में, मैदानी इलाकों में और पहाड़ों पर भी पीपीई पहने नेपाली सुरक्षा बल के जवान लाशों को थैलों में भरकर काठमांडू के बाहरी इलाके स्थित गोरकर्ण वन इलाके में ले जा रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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पड़ोसी देश नेपाल में 26 अगस्त 2026 को हिमालय से जल सैलाब उतरा। लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। हजारों घर पल भर में ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस बाढ़ से तबाही के वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हुए। लेकिन अब पानी निकल जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। मलबे और कीचड़ में जगह-जगह लाशें मिल रही हैं। जिसे ठिकाना लगाना बहुत चुनौतियों भरा काम साबित हो रहा है।
नेपाल में कोरोना काल जैसा नजारा
कोविड काल 2020 में शुरू हुआ तो दुनिया ने कोरोना वायरस का कहर देखा। पहली बार इतिहास में कई सदियों में ऐसी महामारी देखी गई थी। अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ है। आपको याद होगा चीन का वो नजारा, जिसमें लाशों को गाड़ियों में लोड कर दफनाया जाता था। आरोप लगा था कि वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस ने सबसे पहले चीन को ही चपेट में लिया था। वहां हजारों की संख्या में मौत होती रही और सरकार लाशों को चुपके-चुपके दफनाती रही। एक बार फिर वैसा ही नजारा नेपाल में देखने को मिल रहा है, लेकिन यहां मजबूरी है।
लगातार बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
नेपाल में अचानक आए फ्लैश फ्लड ने हजारों लोगों को काल के गाल में समा लिया। धीरे-धीर मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1050 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं। जबकि अब भी 4000 से ज्यादा लोग लापता हैं। हालांकि नेपाली सेना ने कड़ी मशक्कत के बाद अब तक 12000 लोगों को बचा लिया है।
सेना के लिए अंतिम संस्कार बड़ी चुनौती
नेपाली सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है इतनी बड़ी संख्या में बरामद शवों का कैसे पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार किया जाए। मोरचरी लाशों से भर गई है। मुर्दाघर में जगह नहीं बची है। बता दें कि नेपाल में करीब 350 शवों को ही रखने की सुविधा है। ऐसे में वहां सामूहिक अंतिम संस्कार शुरू हो गया है। सड़कों पर, जंगलों में, मैदानी इलाकों में और पहाड़ों पर भी पीपीई पहने नेपाली सुरक्षा बल के जवान लाशों को थैलों में भरकर काठमांडू के बाहरी इलाके स्थित गोरकर्ण वन इलाके में ले जा रहे हैं।
किन इलाकों में मिली सबसे ज्यादा लाशें?
शवों पर निशान लगाकर उन्हें दफनाया जा रहा है। बड़े थैलों में टैग लगा है, ताकि जरूरत पड़ने पर निकाल कर पहचान किया जाए। दफनाए गए शवों का पहले ही डीएनए ऱख लिया गया है। ताकि जरूरत पड़ने पर परिवार से मिलान किया जा सके। सबसे ज्यादा रसुवा और नुवाकोट इलाके बाढ़ से प्रभावित हुए थे। ऐसे में इन्हीं इलाकों से सबसे ज्यादा लाशें बरामद हो रही हैं। सबसे ज्यादा 321 शव चितवन जिले में मिले हैं। यह एक निचला इलाका है। ऐसे में लाशें बहकर यहां तक पहुंच गईं, जो पानी उतरने के बाद मिल रही हैं।
मंत्रिमंडल को लेना पड़ा ये फैसला
बाढ़ के पानी उतरने के बाद लगातार मिल रही सड़ी गड़ी लाशों का प्रबंधन सरकार के लिए बड़ी मुसीबत है। अगर इनका जल्द से जल्द निपटारा नहीं किया गया तो भीषण महामारी फैल सकती है। इसलिए सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक कर नेपाल पुलिस अधिनियम 1955 की धारा 22 (क) में संशोधन भी किया है।
भारत की टीम के साथ सुरंग में रेस्क्यू
भारत की एक सुरंग बचाव टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर रसुवा जिले के चिलिमे में स्थित महत्वपूर्ण जलविद्युत सुरंग स्थलों पर संयुक्त खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। जहां करीब 900 से ज्यादा होग फंसे हैं। सेना की कोशिश है कि जल्द से जल्द इन तक पहुंच कर जान बचाई जा सके।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 1 September 2026 at 21:51 IST