अपडेटेड 16 March 2026 at 12:18 IST
2021 तख्तापलट के बाद पहली बार बुलाई गई म्यांमार संसद, सेना का 90% सीटों पर नियंत्रण
म्यांमार में 5 साल बाद संसद की बैठक हुई, जहां सेना ने 90% सीटों पर कब्जा जमाया है। 2021 तख्तापलट के बाद हुए चुनावों में NLD ने बहिष्कार किया था। आलोचक इसे सेना की सत्ता वैध करने की कोशिश बता रहे हैं।
म्यांमार में पांच साल से अधिक समय बाद सोमवार को संसद का पहला सत्र शुरू हुआ। फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद सेना ने सत्ता हथिया ली थी और तब से कोई विधायिका नहीं बुलाई गई थी। अब दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में चरणबद्ध चुनावों के बाद नई संसद की शुरुआत हुई है, लेकिन इन चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल शामिल नहीं हुए थे।
सेना ने दोनों सदनों में लगभग 90 प्रतिशत सीटों पर नियंत्रण कर लिया है। कुल 586 सीटों वाली संसद में सेना के लिए पहले से ही 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं, और बाकी में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) ने 339 सीटें जीती हैं। अन्य छोटे दलों ने 1 से 20 सीटें हासिल की हैं।
निचले सदन (373 सीटों) की बैठक संसद भवन में शुरू हुई, जहां सांसदों और सैन्य प्रतिनिधियों ने पारंपरिक वेशभूषा में शपथ ली। इस दौरान सुरक्षा कड़ी थी, सड़कें सील कर दी गईं और वाहनों की जांच की गई। ऊपरी सदन की बैठक 18 मार्च को और क्षेत्रीय संसदों की 20 मार्च को होने वाली है।
2021 में तख्तापलट
यह चुनाव आलोचकों द्वारा नकली और सेना की सत्ता को वैधता देने की कोशिश बताया जा रहे हैं। 2021 के तख्तापलट के बाद सेना ने आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi) की निर्वाचित सरकार को हटा दिया था। उनकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) पार्टी को 2023 में नए नियमों के तहत पंजीकरण न करने पर भंग कर दिया गया था। NLD ने इन चुनावों का बहिष्कार किया क्योंकि उन्हें निष्पक्ष नहीं माना गया।
म्यांमार की 80 साल की पूर्व नेता आंग सान सू की अलग-अलग राजनीतिक आरोपों में 27 साल जेल की सजा काट रही हैं। उनकी पार्टी ने 2015 और 2020 के चुनावों में भारी जीत हासिल की थी, लेकिन नए सैन्य नियमों के तहत पंजीकरण कराने से इनकार करने के बाद 2023 में उसे भंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
तख्तापलट के बाद गृहयुद्ध
सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग वर्तमान में सैन्य सरकार के प्रमुख हैं, उनके राष्ट्रपति बनने की संभावना है। हालांकि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति सेना प्रमुख का पद नहीं संभाल सकता, इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे सेना प्रमुख का पद छोड़ेंगे या कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे। म्यांमार में 2021 के तख्तापलट के बाद गृहयुद्ध जारी है, जिसमें लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। सेना इन चुनावों को लोकतंत्र की ओर वापसी का दावा करती है, लेकिन वास्तव में सत्ता पर उसका कब्जा मजबूत हो गया है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 16 March 2026 at 12:18 IST