इजरायल-ईरान हमलों से तेल बाजार में भूचाल, तेल की कीमतें 4% उछलीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर खतरा

दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 4% से ज्यादा बढ़ गईं। इजरायल-ईरान के नए हमलों से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड 97.15 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 94.61 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इससे महंगाई बढ़ने, ब्याज दरों पर असर और आम लोगों के खर्च में इजाफा होने की आशंका है।

तेल की कीमतें 4% उछलीं | Image: AP/File

दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें एक दिन में 4 प्रतिशत से ज्यादा उछल गईं। मुख्य वजह इजरायल और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए हमले हैं, जिनसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का डर बढ़ गया है। यह जलमार्ग तेल सप्लाई के लिए बहुत महत्वपुर्ण है, यहां से दुनिया भर का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होकर गुजरता है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4.47% बढ़कर 97.15 डॉलर प्रति बैरल हो गई। अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत भी 4.50% चढ़कर 94.61 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। कल तक बाजार में उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो सकता है। इसी वजह से शुक्रवार को तेल सस्ता हो गया था।

शांतिक समझौतों की खबरों के बीच रविवार को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दाग दीं। इजरायल ने भी जवाब में ईरान के एक पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा था और कहा था कि डील बहुत करीब है, लेकिन फिर भी हमले रुक नहीं सके।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों इतना जरूरी है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी से तेल ले जाने वाला सबसे बड़ा रास्ता है। दुनिया का बहुत बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह बंद हुआ तो तेल की सप्लाई रुक सकती है और कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं। इस तनाव की वजह से OPEC+ देशों ने जुलाई में 1,88,000 बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन होर्मुज ब्लॉकेज की वजह से कई देश अपना टारगेट पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

इसका असर क्या होगा?  

  • ऊंची तेल कीमतें अमेरिका और दूसरे देशों में महंगाई बढ़ा सकती हैं।  
  • आम लोगों के घर का खर्च बढ़ जाएगा।  
  • अमेरिका में मई महीने में कंज्यूमर सेंटिमेंट रिकॉर्ड कम स्तर पर पहुंच गया।  
  • फेडरल रिजर्व (अमेरिकी सेंट्रल बैंक) की ब्याज दरें कम करने की उम्मीद अब और कम हो गई है।  
  • Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 में भी ब्याज दरें नहीं घटेंगी और कटौती 2027 में ही हो सकती है।

फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वार्श 16-17 जून को अपनी पहली मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। इस मीटिंग में तेल की ऊंची कीमतें और महंगाई एक बड़ी चिंता बनी रहेगी।

पिछला रिकॉर्ड

फरवरी के अंत में इजरायल-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। तेल की कीमत मार्च में चरम पर थीं। अब फिर वही डर लौट आया है। दोनों देशों के बीच नए हमलों ने पूरे तेल बाजार को हिला दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा, क्योंकि होर्मुज की सुरक्षा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 8 June 2026 at 18:27 IST