Iran US War: अमेरिका पर जोरदार हमले की तैयारी कर रहा ईरान, हिज्बुल्लाह को किया अलर्ट; खामेनेई के जनाजे के समय हुई थी सीक्रेट मीटिंग
ईरान ने अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच हिजबुल्लाह समेत अपने सहयोगियों को बड़े संघर्ष की तैयारी का निर्देश दिया है। तेहरान की बैठकों में यह चेतावनी दी गई कि इंतजार का समय खत्म हो रहा है। इसका मतलब है कि ईरान अपना प्रतिरोध नेटवर्क सक्रिय कर रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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ईरान ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों, खासकर लेबनान के हिजबुल्लाह को अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच बड़े और व्यापक संघर्ष की संभावना के लिए तैयार रहने को कहा है। लेबनान के अखबार निदा अल वतन के अनुसार यह जानकारी तेहरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के हालिया अंतिम संस्कार के दौरान हुई बैठकों से मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान समर्थित 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' के नेता अपने सहयोगियों से कह रहे हैं कि अब इंतजार का समय खत्म हो रहा है और सैन्य तैयारियां सबसे जरूरी हो गई हैं। हिजबुल्लाह को किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य का कोई भी संघर्ष पहले के मुकाबले ज्यादा व्यापक, गंभीर और लंबा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अभी भी हिजबुल्लाह को अपना सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साथी मानता है, भले ही हाल के महीनों में उसके कुछ अन्य सहयोगी समूहों को नुकसान पहुंचा हो।
'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' क्या है?
'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' इरान का वह नेटवर्क है जिसमें हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (फिलिस्तीन), हूती (यमन) और इराक के कुछ समूह शामिल हैं। ईरान इन्हें हथियार, पैसा और ट्रेनिंग देता है। अब वह इन्हें बता रहा है कि छोटे-मोटे झगड़ों का समय गया, अब बड़ी तैयारी करो।
इस अलर्ट के क्या हैं मायने?
इसका सीधा मतलब है कि मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ रहा है। ईरान अपने सहयोगी देशों और समूहों को एकजुट कर रहा है ताकि अगर अमेरिका या इजरायल के साथ कोई बड़ा टकराव हो तो वे साथ मिलकर लड़ सकें।
हिजबुल्लाह को खास तौर पर तैयार रहने को कहा जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरान का सबसे मजबूत और करीबी साथी है। ईरान को डर है कि अगर अकेले लड़ना पड़ा तो नुकसान ज्यादा हो सकता है, इसलिए वह पूरे नेटवर्क को एक साथ सक्रिय करना चाहता है। यह एक तरह की चेतावनी भी है कि अगर कोई हमला हुआ तो जवाब सिर्फ ईरान से नहीं, बल्कि कई मोर्चों से आएगा।
हूती बंद कर सकते हैं लाल सागर
ईरान ने फारस की खाड़ी के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बाधित कर रखा है। अब वह अपने यमनी सहयोगी हूती विद्रोही (Houthi Rebels) के जरिए लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को भी बंद करने का संकेत दे रहा है। विश्व की दो सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति लाइनों पर खतरा मंडरा रहा है, जिसका असर तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
बाब अल-मंदेब यमन और जिबूती (Djibouti) के बीच स्थित संकरा जल मार्ग है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से सऊदी अरब का तेल निर्यात और यूरोप-एशिया के बीच का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यह मार्ग बंद हो गया तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) का लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे।
लाल सागर यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक जलमार्ग है। यह विश्व व्यापार का लगभग 12%, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर यातायात का 30%, और वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। यह मार्ग एशिया और यूरोप के बीच की दूरी को बहुत कम कर देता है।
भारत पर क्या असर होगा?
ईरान और अमेरिका का युद्ध अगर बढ़ता है, तो भारत पर इसका सीधा और अप्रत्यक्ष दोनों तरह का असर पड़ सकते हैं। मध्य पूर्व में बड़ा संघर्ष होने पर तेल की सप्लाई प्रभावित होती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ेंगी। इससे महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा।
UAE, सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और वहां से अरबों रुपये का रेमिटेंस आता है। अगर युद्ध फैला तो उनकी नौकरियां और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भारत का अमेरिका, इजरायल और ईरान तीनों के साथ अच्छा संबंध है। भारत को बहुत सावधानी से संतुलन बनाना होगा।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 17 July 2026 at 19:40 IST