मोदी-जयशंकर से हुई बातचीत के बाद ईरान विदेश मंत्री का बड़ा बयान, होर्मुज से सभी जहाजों को गुजरने देने के लिए तैयार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ हुई विस्तृत चर्चा में हार्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी की स्थिति पर लगभग समान विचार रखते हैं। दोनों देश क्षेत्र में सुरक्षा और हितों को लेकर चिंतित हैं। ईरान होर्मुज से सभी जहाजों को गुजरने देने के लिए तैयार हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत के साथ हालिया उच्च-स्तरीय वार्ताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कल उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छी और संक्षिप्त चर्चा की, जबकि आज विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ लंबी बैठक हुई।
अराघची ने बताया, “हमने लगभग हर मुद्दे पर चर्चा की, जिसमें हार्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति भी शामिल है। मैं यह कह सकता हूं कि हमारी स्थितियां लगभग समान हैं और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में हमारे समान चिंताएं व हित हैं।”
ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि भारत के साथ समन्वय जारी रहेगा। उन्होंने हार्मुज जलडमरूमध्य की जटिल स्थिति का जिक्र करते हुए बताया, “हम जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। एक बार आक्रामक कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।”
"किसी दबाव या धमकी से नहीं झुकेंगे"
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "हम फिलहाल युद्धविराम की स्थिति में हैं, हालांकि यह बहुत अस्थिर है। ईरान से संबंधित किसी भी मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने बार-बार हमारी परीक्षा ली है। हम किसी भी दबाव या धमकी के आगे कभी नहीं झुकेंगे। हम किसी भी प्रतिबंध का भी विरोध करते हैं, ईरानी लोग केवल सम्मान की भाषा समझते हैं।"
भारत-ईरान के साझा हित
भारत और ईरान दोनों ही हार्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले ऊर्जा आयात और व्यापार पर निर्भर हैं। इस जलमार्ग से विश्व के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
दोनों देश लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय करते आए हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मध्य पूर्व में तनाव
अब्बास अराघची का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है। हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, लेकिन शांति तभी बहाल होगी जब “आक्रामक कार्रवाई” पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
भारत ने हमेशा क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर की ईरानी पक्ष के साथ हुई बैठकें दोनों देशों के बीच सामरिक संवाद को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 15 May 2026 at 17:04 IST