पिता अली खामेनेई के जनाजे में शामिल हुए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई? जनाजे की नमाज में काला मास्क पहने दिखा एक मिस्ट्री मैन

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनेई और परिवार के सदस्यों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है। उनके तीन बेटे जनाजे की नमाज में शामिल हुए। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मोजतबा खामनेई भी चोरी-छिपे पिता के जनाजे में शामिल हुए।

जनाजे में काले मास्क वाला मिस्ट्री मैन कौन? | Image: AP

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्यों का राजकीय अंतिम संस्कार मशहद (Mashhad) स्थित इमाम रजा दरगाह में संपन्न हो गया है। जिनकी फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में मौत हो गई थी। अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अब नए सुप्रीम लीडर हैं।

अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे की नमाज उनके सबसे बड़े बेटे मोस्तफा खामेनेई ने पढ़ाई। अपने पिता के अंतिम सफर में मोजतबा खामेनेई शामिल नहीं हुए, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो से वायरल हो रही है। जिसमें एक एक चुनिंदा समूह के साथ एक व्यक्ति खड़ा था। उस व्यक्ति के सिर पर काली कैप और चेहरे पर बड़ा मास्क लगा था, जिससे उसकी पहचान पूरी तरह छिपी हुई थी।

July 10, 2026

सोशल मीडिया पर तुरंत चर्चा शुरू हो गई कि यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई हैं। नेटिजंस कर रहे हैं कि मोजतबा अपने पिता के अंतिम संस्कार में छिपकर शामिल हुए हैं, क्योंकि मोजतबा खामेनेई हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं।

क्या जनाजे में शामिल हुए मोजतबा?

राज्य टेलीविजन ने दिखाया कि खामनेई के तीन बेटे मुस्तफा, मेयसम और मसूद खामनेई ताबूतों के पास प्रार्थना कर रहे थे। लेकिन नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई कहीं सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे।

मोजतबा खामनेई क्यों नहीं आए?

अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में हुई थी। मोजतबा खामनेई को उसी हमले में गंभीर चोटें आई थीं। मीडियो रिपोर्ट के अनुसार उनके चेहरे और पैरों में भी काफी नुकसान हुआ। इसी वजह से वे अभी तक सार्वजनिक रूप से कहीं नहीं दिखे हैं। शोक व्यक्त करने आए कई लोगों ने कहा कि वे नए नेता को देखने की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन वे नहीं आए।

हजारों लोग शोक में शामिल

अली खामेनेई के जनाजे में लाखों लोग शामिल हुए थे। काले कपड़े पहनकर पहुंचे लोग अमेरिका-इजरायल से बदला लेने वाले झंडे लहरा रहे थे। ताबूतों खामनेई के अलावा उनकी बेटी, दामाद, बहू और सिर्फ 14 महीने की एक पोती भी शामिल थी।  अंतिम संस्कार की रस्म को भीड़ ज्यादा होने की वजह से रात 10 बजे तक बढ़ा दिया गया। राज्य मीडिया के अनुसार, लोग लंबी कतारों में खड़े होकर श्रद्धांजलि दे रहे थे।

कई दिनों तक चला कार्यक्रम

ईरान सरकार ने पूरे हफ्ते बड़े पैमाने पर शोक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। खामनेई के शव को कुम, नजफ, करबला और मशहद जैसे पवित्र शहरों में भी ले जाया जाएगा। यह अंतिम संस्कार ईरान की क्रांतिकारी भावना और राज्य के प्रति लोगों की भक्ति दिखाने का भी एक तरीका है। युद्ध के बाद देश की स्थिति अभी भी नाजुक है, लेकिन लोग एकजुट होकर शोक मना रहे हैं।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 11 July 2026 at 21:57 IST