करीब 36 साल बाद अपनी मां से पहली बार हुई बेटे की मुलाकात, 9 महीने की उम्र में चोरी कर लाया गया था अमेरिका
अमेरिका में रहने वाले काइल एडलर करीब 36 साल बाद अपनी असली मां से मिले हैं। जब वे सिर्फ 9 महीने के थे, तब उन्हें चोरी कर अमेरिका लाया गया था। DNA टेस्ट की मदद से उन्होंने अपनी असली मां मारिया को ढूंढ निकाला। फरवरी 2026 में वैलेंटाइन डे पर दोनों की पहली मुलाकात हुई।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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अमेरिका के डेनवर शहर में रहने वाले काइल एडलर (Kyle Adler) का जन्म चिली में हुआ था। उनका असली नाम मार्कोस एंटोनियो नावारेते (Marcos Antonio Navarrete) था। जब वे सिर्फ 9 महीने के थे, तब उन्हें चोरी कर लिया गया और गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका में गोद ले लिया गया।
अब तीन दशक से अधिक समय के बाद वे अपनी असली मां अना मारिया नवारेते (Ana Maria Navarrete) से मिले हैं। यह मुलाकात फरवरी 2026 में सैंटियागो, चिली में हुई। दोनों के लिए ये बहुत ही भावुक पल था।
क्या हुआ था?
काइल की असली मां मारिया गरीब परिवार से थीं। वे रात में मछली की दुकान पर काम करती थीं। उन्होंने काइल को एक देखभाल करने वाली महिला के पास रखा था। एक दिन उस महिला ने बताया कि बच्चे को एक अमेरिकी दंपति को दे दिया गया है।
20,000 से ज्यादा बच्चे हुए गायब
यह घटना जनरल Augusto Pinochet Ugarte के तानाशाही शासन (1973-1990) के समय हुई। उस समय गरीब और आदिवासी परिवारों के हजारों बच्चों को चोरी करके विदेशों में गैर-कानूनी गोद लेने के लिए भेजा गया था। चिली सरकार के अनुसार, 20,000 से ज्यादा बच्चे इस तरह गायब हुए।
काइल को कैसे पता चला?
काइल बड़े होकर जानना चाहते थे कि उनकी असली मां कौन है। 2017 में उन्होंने Nos Buscamos नाम के एक संगठन से संपर्क किया। DNA टेस्ट से पुष्टि हुई कि मारिया उनकी असली मां हैं।
परिवार की खुशी
फरवरी 2026 में काइल चिली गए और वैलेंटाइन डे पर अपनी मां से मिले। दोनों की मुलाकात बहुत भावुक थी। एक-दूसरे से मिलकर दोनों के आंसू नहीं रुके। काइल ने कहा, “अब मुझे लगता है कि मेरे लोग मिल गए हैं। मुझे परिवार का प्यार फिर से मिला है।”
काइल अपनी मां के साथ उस शहर गए, जहां वे पैदा हुए थे। उन्होंने अस्पताल, पुराना घर देखा और अपने भाई-बहनों से मिले। उनकी मां अब उम्मीद करती हैं कि परिवार फिर से पूरा हो जाएगा।
पिनोशे काल की काली सच्चाई
जनरल ऑगस्टो पिनोशे के सैन्य शासन के दौरान चिली में हजारों गरीब और स्वदेशी परिवारों के नवजात बच्चों को चोरी कर विदेशों में बेच दिया गया था। सरकार और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 20,000 से अधिक बच्चे इस नेटवर्क का शिकार बने। गरीब माताओं को अक्सर बताया जाता था कि उनका बच्चा मर गया है, जबकि उन्हें अवैध रूप से विदेशी दंपतियों को सौंप दिया जाता था।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 28 May 2026 at 22:14 IST