अपडेटेड 16 March 2026 at 14:45 IST

ब्रेंट क्रूड के दाम 2 साल में टॉप पर, 106 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, ईरान-इजरायल जंग से दुनिया भर में महंगाई बढ़नी तय

ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज ऑफ स्ट्रेट में तेल परिवहन ठप होने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 106 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इस युद्ध से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के पार | Image: AP

वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें एक बार फिर तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है। जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पिछले शुक्रवार को 103.14 डॉलर पर बंद हुई थी।

पिछले सप्ताह तेल की कीमत में 11 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जिसमें सप्ताह भर में 9 प्रतिशत की उछाल आई है। यह रेट अगस्त 2022 के बाद सबसे ऊंचा है।

युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज ऑफ स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ले जाता है। ईरान के हमलों के डर से टैंकर फंस गए हैं, जिससे मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

अमेरिका में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत सोमवार को 3.72 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 25 प्रतिशत अधिक है। वहीं डीजल की कीमत में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे आम अमेरिकी ड्राइवरों पर बोझ बढ़ गया है।

युद्ध के बाजार में हलचल

शेयर बाजारों में मिश्रित रुख देखा गया। एशिया में जापान के सूचकांक गिरे, जबकि दक्षिण कोरिया और हांगकांग में बढ़त रही। अमेरिकी S&P 500 फ्यूचर्स में 0.6 प्रतिशत की बढ़त का संकेत मिला। पिछले सप्ताह Nikkei 225 में 3 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई, जबकि S&P 500 में 1.6 प्रतिशत और यूरोप के Stoxx 600 में 0.5 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय बाजारों में कुल 6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज ऑफ स्ट्रेट की समस्या बनी रहने तक तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। तेल आयात करने वाले देशों जैसे एशिया और यूरोप में आर्थिक प्रभाव ज्यादा गहरा हो सकता है। युद्ध का आगे का रुख कीमतों को तय करेगा।

ये भी पढ़ें: 2021 तख्तापलट के बाद पहली बार बुलाई गई म्यांमार संसद, सेना का 90% सीटों पर नियंत्रण

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 16 March 2026 at 14:45 IST