अपडेटेड 12 February 2026 at 08:25 IST
Bangladesh Election 2026: जमात या BNP, बांग्लादेश में किसकी सरकार? 299 सीटों पर जारी मतदान, शुरुआत में ही लगे धांधली के आरोप
बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार देश नई सरकार चुनने जा रही है। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी पार्टी के बीच होना है।
Bangladesh Election: बांग्लादेश में 12 फरवरी यानी आज देश के इतिहास का आम चुनाव होने जा रहा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार देश नई सरकार चुनने जा रही है। ऐसे में इस संसदीय चुनाव पर भारत की पैनी नजर बनी हुई है।
यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक सत्ता के हस्तांतरण तक सीमित नहीं, बल्कि यह नए बांग्लादेश के निर्माण का परीक्षण भी है। यह चुनाव ऐसे वक्त पर हो रहा है जब देश की पारंपरिक राजनीति में पूरी तरह से बदलाव आ चुका है। दो दशकों तक सत्ता में रहीं शेख हसीना देश से बाहर हैं। उनकी पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं है, ऐसे में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी पार्टी के बीच होना है।
299 सीटों में से एक पर क्यों नहीं होगी वोटिंग?
जानकारी के अनुसार, वोटिंग स्थानीय समयानुसार सुबह साढ़े 7 बजे से शुरू हो चुकी है, जो शाम साढ़े 4 बजे तक चलेगी। कुल 299 संसदीय सीटों पर मतदान होंगे। एक सीट (Sherpur-3) पर जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार के निधन के चलते मतदान स्थगित किया गया है। मैदान में कुल 50 राजनीतिक दल हैं। जहां 1,755 उम्मीदवार राजनीतिक दलों की ओर से, तो वहीं 273 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे हैं। करीब 12.7 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुनाव लड़ेंगे।
बांग्लादेश में चुनाव के मुद्दे क्या?
बांग्लादेश चुनाव में सियासी मुद्दा संवैधानिक सुधार (जुलाई चार्टर), भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और भारत के साथ संबंध है। इस बार हर मतदाता को दो वोट डालने हैं। पहला वोट चुनाव का और दूसरा संवैधानिक रेफरेंडम का है। संसदीय चुनाव का वोट सफेद बैलेट पेपर पर पड़ेगा, जबकि रेफरेंडम गुलाबी बैलट पेपर पर डाला जाएगा।
बता दें कि रेफरेंडम छात्र आंदलोन के बाद हुए सुधारों के पैकेज का बताया जा रहा है। यहां वोटर्स को हां या नहीं का विकल्प चुनना होगा।
क्यों टिकी भारत की निगाहें?
बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव के साथ ही यह तय हो गया है कि अब कुछ ही दिनों में जब भारत अपने रिश्तों को लेकर बांग्लादेश से संपर्क में होगा, तब उसकी बात मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार नहीं, बल्कि एक स्थायी-चुनी हुई सरकार से होगी। ऐसे में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब भारत के लिए अगली सरकार से चर्चा की रणनीति काफी अहम होने वाली है।
बांग्लादेश में आम चुनाव भारत के लिए हल्की चिंता का विषय है। इस चुनाव के साथ यह तय हो चुका है कि अब जब भारत अपने रिश्तों को लेकर बांग्लादेश से संपर्क में होगा, तब बात मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार से नहीं, बल्कि एक स्थायी-चुनी हुई सरकार से होगी। ऐसे में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब भारत के लिए अगली सरकार से चर्चा की रणनीति काफी महत्वपूर्ण होगी। भारत को बिल्कुल नई राजनीतिक हकीकत से आमना-सामना करना पड़ेगा।
क्यों गिरी थी शेख हसीना की सरकार?
पिछले साल 2024 के जुलाई-अगस्त आरक्षण नीति सुधार को लेकर व्यापक आंदोलन हुआ, जो कि सिर्फ 48 घंटों में राष्ट्रव्यापी बगावत बन गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आंदोलन में करीब 1200 से लेकर 1400 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20,000 घायल हुए थे। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में इस आंदोलन को बांग्लादेश का Largest Civilian Uprising कहा गया। सरकार के दमन अभियान के बाद सेना तटस्थ हो गई और संसद भंग हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा।
हसीना सरकार के पतन के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 12 February 2026 at 07:48 IST