अपडेटेड 22 January 2026 at 08:30 IST
अमेरिका-डेनमार्क खुद सुलझा लें, ग्रीनलैंड विवाद में रूस का कोई लेना देना नहीं; ट्रप के 'हर हाल में हासिल' वाले बयान पर पुतिन ने बताया सच
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या हासिल करने की जिद पर भड़के विवाद में रूस को पूरी तरह अलग रखा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या हासिल करने की जिद पर भड़के विवाद में रूस को पूरी तरह अलग रखा है। बुधवार रात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान टीवी पर दिए बयान में पुतिन ने कहा कि यह मामला रूस का बिल्कुल नहीं है और उन्हें भरोसा है कि अमेरिका व डेनमार्क इसे आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे।
दरअसल, ट्रंप का ग्रीनलैंड को 'हर हाल में' हासिल करने का बयान डेनमार्क में आक्रोश का कारण बन गया है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, जो आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और अपनी रणनीतिक स्थिति व प्राकृतिक संसाधनों के कारण वैश्विक महत्व रखता है। ट्रंप की इस मांग ने न सिर्फ डेनमार्क को नाराज किया है, बल्कि नाटो के अन्य सदस्य देशों में भी बेचैनी पैदा कर दी है। कई नाटो सहयोगी इसे गठबंधन की एकता को कमजोर करने वाला कदम बता रहे हैं, क्योंकि इससे पश्चिमी देशों के बीच अविश्वास बढ़ सकता है।
'रूस को कोई चिंता नहीं'
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ग्रीनलैंड के साथ जो भी होता है, वह हमारे कोई काम का नहीं। मुझे लगता है कि वे खुद ही इस मामले को सुलझा लेंगे।" उन्होंने इस मुद्दे को रूस के हितों से पूरी तरह अलग बताते हुए किसी भी हस्तक्षेप की गुंजाइश खारिज कर दी। पुतिन का यह रुख रूस की विदेश नीति को प्रतिबिंबित करता है, जो पश्चिमी विवादों से दूरी बनाए रखने पर जोर देती है।
डेनमार्क के 'क्रूर' रवैये पर तंज
पुतिन ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड के प्रति ऐतिहासिक रवैये पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक कॉलोनी की तरह ही ट्रीट किया है और उसके साथ कठोर, बल्कि क्रूर व्यवहार अपनाया है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान विवाद इससे अलग है और अभी किसी को इसमें दखल देने की ज़रूरत नहीं।
ऐतिहासिक उदाहरण देकर सबक
अपने बयान को मजबूत करने के लिए पुतिन ने ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 1917 में डेनमार्क ने वर्जिन आइलैंड्स को अमेरिका को बेच दिया था। इसी तरह, 1867 में रूस ने अलास्का को महज़ 7.2 मिलियन डॉलर में अमेरिका को हस्तांतरित कर दिया था। इन उदाहरणों से पुतिन ने संकेत दिया कि ऐसी डीलें इतिहास में असामान्य नहीं हैं।
ट्रंप की इस मांग से पश्चिमी खेमे में तनाव चरम पर है, लेकिन रूस ने साफ़ संदेश दिया है कि वह इसे अमेरिका-डेनमार्क के बीच का द्विपक्षीय मामला मानता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान वैश्विक कूटनीति में रूस की सतर्क रणनीति को दर्शाता है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 22 January 2026 at 08:30 IST