PoK में पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार बगावत, PAK सेना ने प्रदर्शनकारियों पर की अंधाधुंध फायरिंग, छोड़े आंसू गैस के गोले; JAAC का दावा- 27 लोगों की हुई मौत
PoK Unrest: पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (POJK) में प्रदर्शनकारियों में जोरदार प्रदर्शन जारी है। JAAC के नेतृत्व में लॉन्ग मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हो गया। इस दौरान पाकिस्तान की सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर के खिलाफ नारेबाजी भी हो रही है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू हो गए हैं। 9 जून को बुलाए गए बंद और विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। रावलकोट से लेकर मुजफ्फराबाद, कोटली, पालंदरी समेत कई इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई और आंसू गैस के गोले भी दागे। इसमें कई लोगों की मौत की खबर है। बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के 9 जून के लॉन्ग मार्च और बंद के आह्वान के बाद पूरे इलाके में हिंसा भड़क उठी। रावलकोट में सुबह 11 बजे से ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर रहे है। इस दौरान मुख्य सड़क को जाम कर दिया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी पुलिस, सेना और रेंजर्स ने फायरिंग की है। इसके अलावा आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
रावलकोट की कई मस्जिदों से लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की जा रही है। घोषणाओं में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर की धरती पर फिरंगी फोर्स की तरफ से हमला किया गया है और 'तमाम कश्मीरियों से गुजारिश है कि मार्च में शामिल हों।
PoK में क्यों हो रहे प्रदर्शन?
इससे पहले रविवार (7 जून) रात की झड़पों में जिसमें सात नागरिकों की जान चली गई थी। वहीं, 5 जून को PoJK प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद निरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया, दफ्तरों को सील किया गया, इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर रोक लगाई गई और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई।
प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि 5 जून की रात से ही पूरे PoK में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे क्षेत्र में संचार पूरी तरह ठप हो गया है।
JAAC लंबे समय से महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, खराब प्रशासन और क्षेत्र की राजनीतिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को उठाता रहा है। संगठन ने 38 सूत्री मांगों का एजेंडा सामने रखा है जिसमें बिजली और आटे पर सब्सिडी, आर्थिक सुधार और स्थानीय स्वशासन प्रमुख हैं। इसके अलावा JAAC विधानसभा में गैर-निवासियों के लिए 12 आरक्षित सीटों का भी विरोध करता है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान की बड़ी पार्टियां PoK की स्थानीय विधानसभा पर बाहर से कब्जा जमा लेंगी।
ब्रिटेन के सांसदों ने भी जताई चिंता
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी खींचा है। विदेशों में बसे PoK के लोग खूब प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्रिटेन के कई सांसदों ने भी रावलकोट में हुई मौतों और घायलों की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने इस घटना को 'नरसंहार' करार देते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कड़ी निंदा की है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 9 June 2026 at 16:07 IST