JACC पर बैन और PoK में कत्लेआम बना शहबाज शरीफ के लिए जंजाल, UK में सांसदों पत्र लिख मांगा जवाब, अब मुश्‍किल में पाक आर्मी चीफ मुनीर

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छिड़ी भारी हिंसा और दमन के खिलाफ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुस्सा भड़क उठा है। वॉशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया है।

JACC पर बैन और PoK में कत्लेआम बना शहबाज शरीफ के लिए जंजाल, UK में सांसदों पत्र लिख मांगा जवाब, अब मुश्‍किल में पाक आर्मी चीफ मुनीर | Image: X

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छिड़ी भारी हिंसा और दमन के खिलाफ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुस्सा भड़क उठा है। वॉशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया है। दमन को देखते हुए ब्रिटेन के 50 से अधिक सांसदों ने हिंसा के खिलाफ साझा पत्र लिखा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने सीधी गोलीबारी की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ ही दिनों में 40 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है और 100 से ज्यादा लोगों के गायब होने का अंदेशा जताया जा रहा है। सांसदों ने कहा कि ब्रिटेन में रह रहे कई कश्मीरी परिवारों को अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपील की है कि वह कूटनीतिक स्तर पर बातचीत को बढ़ावा दे ताकि हालात जल्द शांत हो सकें।

हिंसा को लेकर पाकिस्तान सरकार से मांगा जवाब

वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रावलाकोट में क्षेत्रीय चुनाव के पहले दिन हुई हिंसा को लेकर पाकिस्तान सरकार से जवाब मांगा है। संस्था की कार्यवाहक दक्षिण एशिया निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

जवाबदेही की उठी मांग

सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट में हताहतों की बढ़ती संख्या के बीच जवाबदेही की मांग करने के लिए प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी दूतावास के बाहर जमा हुए। यह विरोध प्रदर्शन पीओके में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है। यहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत और घायल होने की खबरें हैं।

रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने गोलियों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट में इस जमावड़े को इलाके में गंभीर मानवीय संकट के खिलाफ विरोध बताया गया। इसमें शामिल लोगों ने मरने वालों और घायलों की बढ़ती गिनती और इंटरनेट और फोन कॉल्स पर लगी पाबंदियों पर सवाल है।

पीओके में क्यों भड़की हिंसा?

पीओके में अशांति का संबंध जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की अगुवाई में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से है। ये प्रदर्शन कई तरह की राजनीतिक और आर्थिक मांगों को लेकर हो रहे हैं। इनमें शासन-व्यवस्था, अधिकारों और जन-सुविधाओं से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं में भी रुकावटें आई हैं। हिंसा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं। मौतों व घायलों के मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मानवाधिकार अधिकारियों ने अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने और आम नागरिकों की सुरक्षा करने का आग्रह किया है।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 1 August 2026 at 12:20 IST