US-Iran: ट्रंप तैयार, ईरान का इनकार... पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता पर संकट के बादल, कहां अटक रही बात?
US Iran Peace talks in Islamabad: अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता फेल हो गई थी। इसके बाद अब दूसरे दौर की बातचीत होनी है, जिसमें शामिल होने से ईरान इनकार कर रहा है।
US- Iran War news: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर संस्पेंस अब तक बरकरार है। बातचीत के लिए अमेरिकी डेलिगेशन तो सोमवार (20 अप्रैल) को पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच रहा है, लेकिन ईरान ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस बीच ईरान को मनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में पाकिस्तान 'चौधरी' बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वे इसमें नाकाम हो रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की वार्ता फेल हो गई थी। समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई। फिलहाल अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू है।
ट्रंप भेज रहे टीम, ईरान ने किया इनकार
ईरान संग दूसरे दौर की वार्ता के लिए व्हाइट हाउस ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाने की पुष्टि कर दी है, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के जाने को लेकर सस्पेंस है। इस बीच ईरान फिलहाल इस बातचीत में शामिल होने से इनकार कर रहा है। दरअसल, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका की नाकेबंदी हटाने की डिमांड रख रहा है, उसके बात दी बातचीत के आसार हैं।
शहबाज ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति के साथ फोन कॉल में क्षेत्र की ताजा स्थिति की समीक्षा की। उन्हें सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के साथ हुई हालिया बातचीत के बारे में जानकारी दी। बातचीत का उद्देश्य युद्ध प्रभावित क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सहमति बनाना था।
‘अमेरिका की मांगें जिम्मेदार’
वार्ता में शामिल न होने के लिए ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका की मांगों को जिम्मेदार ठहराया है। IRNA ने कहा है कि इस्लामाबाद में बातचीत के दूसरे दौर के बारे में चल रही खबरें गलत हैं।
IRNA ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें, अनुचित और अवास्तविक अपेक्षाएं, अपनी स्थितियों में बार-बार बदलाव, लगातार विरोधाभास, और तथाकथित नौसैनिक नाकाबंदी- जो संघर्ष-विराम की आपसी समझ का उल्लंघन करती है और साथ ही धमकी भरी बयानबाजी ने अब तक वार्ताओं में प्रगति को बाधित किया है।
उसने कहा कि इन परिस्थितियों में रचनात्मक बातचीत की संभावनाएं धूमिल बनी हुई हैं। अमेरिका की ओर से प्रकाशित की गई खबरें उनके दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा हैं और यह ईरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से खेला जा रहा एक "दोषारोपण का खेल" है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 20 April 2026 at 07:15 IST