अपडेटेड 24 March 2026 at 22:40 IST
Iran-Israel War: खामखाह 'चौधरी' बन रहा पाकिस्तान, ईरान युद्ध में खुद को बता रहा 'शांति दूत'; शहबाज शरीफ बिन न्योता इधर-उधर लगा रहे कॉल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और संघर्ष के खतरे को लेकर चिंता जताते हुए अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने और बातचीत बहाल करने की मांग की है।
ईरान–अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान सक्रिय रूप से “कूटनीतिक चौधरी” बनने पर आमादा दिख रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और संघर्ष के खतरे को लेकर चिंता जताते हुए अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने और बातचीत बहाल करने की मांग की है। शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जंग रोकने के लिए हर उस प्रयास का समर्थन करता है, साथ ही संघर्ष के राजनयिक समाधान को आगे बढ़ाने में भी पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका और ईरान दोनों पक्ष सहमत हों, तो पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति हेतु व्यापक समझौते के लिए त्रिपक्षीय या द्विपक्षीय वार्ता की मेजबानी करने को तैयार है। उन्होंने इसे न केवल एक जिम्मेदार कूटनीतिक चाल बल्कि राष्ट्र के लिए सम्मान की बात माना। पाकिस्तान की तरफ से लगातार इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री न्यूनतम व्यवस्था के लिए बातचीत ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।
ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर की बात
इससे एक दिन पहले, पीएम शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर लंबी बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, शरीफ ने खाड़ी क्षेत्र में जारी “खतरनाक शत्रुता” और सैन्य तनाव से उत्पन्न जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी पड़ोसी देशों से आपसी मतभेदों को संवाद व कूटनीति के जरिए सुलझाने का आह्वान किया, साथ ही तनाव कम करने और संयुक्त क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया।
ट्रंप–ईरान द्वंद्व पर हलचल
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तेजक कूटनीति में कुछ नरमी दिखाई है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से जुड़ी चेतावनियों की कार्यान्वयन अवधि बढ़ाते हुए कहा कि अमेरिका अब ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर आक्रामक कार्रवाई को पांच दिन आगे टाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी दूत किसी ऊंचे स्तरीय ईरानी नेता के साथ गुप्त बातचीत कर रहे हैं और ईरान समझौते के लिए तैयार है।
वहीं, ईरानी अधिकारी इस दावे को खारिज कर चुके हैं और कह चुके हैं कि ट्रंप के समयबद्ध अंतिम चेतावनियों के बाद अमेरिका ने पीछे हटकर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। ट्रंप ने यह भी बल दिया कि किसी भी संभावित समझौते के तहत ईरान का संवर्धित यूरेनियम देश से निकाला जाना चाहिए और उसके परमाणु कार्यक्रम को लगभग पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
भारत में राजनीतिक बवाल
वहीं भारत में विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस मध्यस्थता के दौरान भारत की उपेक्षा को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि युद्ध से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इजरायल की समयबद्ध यात्रा ने भारत के उदासीन और संतुलित मध्यस्थ के रूप में दिखने की क्षमता को कमजोर कर दिया।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 24 March 2026 at 22:40 IST